6 suspended including civil surgeon in Bhandara fire case

    • अब तक दायर नहीं हुआ है आरोप पत्र
    • आग के बाद की लापरवाही की हुई जांच
    • पर आग क्यों लगी? पर नहीं हुई जांच

    भंडारा. साल 2021 8 जनवरी. मध्यरात्री हुई और तारीख बदली. 9 जनवरी, शनिवार को रात्रि 1 बजे के दौरान दिल दहला देनेवाली घटना घटी. शिशु केयर यूनिट में हुए हादसे ने देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को रूला दिया. आज जब इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को साल पूरा होगा. इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना एक और दुर्भाग्यपूर्ण कडवा सच यह है कि साल पूरा होने के बाद भी 11 मासूमों की मौत के लिए कौन जिम्मेदार था? इस पता जांच एजेंसी नहीं लगा पाई है.

    अब तक इस मामले की चार्जशीट यानी आरोपपत्र अदालत में प्रस्तुत नहीं की जा सकी है. जिस घटना के बाद जिला अस्पताल यह राजनीतिक पर्यटन एवं घड़ियाली आंसू बहाने का केंद्र बन चुका था. वहां अब खामोशी है. जो राजनीतिक हस्तियां हादसे के बाद आयी थी. संभवत: वे सभी इस दिन, हादसे एवं अपने किए वादों को भी भूल बैठे है.

    क्या हुआ उस रात में 

    अब तक को सरकार की ओर से अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है. जिससे अधिकृत तौर पर कहा जा सके कि कितने बजे क्या हुआ? लेकिन उस रात जो प्रत्यक्षदर्शियों से सुना एवं देखा था. उसके आधार पर कहा जा सकता है कि 9 फरवरी को रात के पहले पहर में 1 बजे के दौरान जिला अस्पताल के आऊट बॉर्न युनीट से धुंवा निकलने लगा था. ड्यूटी नर्स ने जब इन कक्ष का दरवाजा खोला. धुआं के झौंके की वजह से नर्स भीतर नहीं जा पायी. उसने चिल्ला कर दूसरों को मद्द के लिए बुलाया.

    लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. इसके बावजूद सुरक्षाकर्मी जान पर खेलते हुए भीतर गए. उन्होने बच्चों को बाहर निकालने का काम शुरू किया. इस बीच फायर बिग्रेड को बुलाया गया. फायर बिग्रेड कर्मियों ने अस्पताल के बाहरी हिस्से के दरवाजे को तोड़कर भीतर प्रवेश किया एवं इन बॉर्न कक्ष से 7 बच्चों को सही सलामत बाहर निकाला. शिशुओं को पहले सीएस केबिन में लाया गया. राहत कार्य शुरू होने के पूर्व ही आऊट बॉर्न कक्ष के उपचार ले रहे सभी 10 शिशु गर्म धुएं से जल भुन चुके थे. उनकी मृत्यु हो चुकी थी.

    9 जनवरी की रात को पूरे देश में भंडारा जिले को शिशु केयर यूनिट अग्निकांड शर्मसार होना पड़ा था. 11 दिन बाद 21 जनवरी को स्वास्थ्य मंत्री ने सिविल सर्जन डा. प्रमोद खंडाते, वैद्यकीय अधिकारी अर्चना मेश्राम के निलंबन, ए.सीएस डा. सुनिता बढे का तबादला, बालरोग तज्ञ डा.सुशील अंबादे का निलंबन, नर्स ज्योति बारस्कर, अधिपरिचारिका स्मिता आंबिलडूके एवं शुभांगी साठवणे को सेवामुक्त किया था. 

    सरकार ने की लीपापोती

    जब स्वास्थ्य मंत्री ने पत्र परिषद ली थी. तभी से अंदाजा लग रहा था कि सरकार मामले की लीपापोती कर रही है. हर शक्ख गुस्से में था. लेकिन बाद में सभी इस मामले को भूल गए. जिन लोगों की घटना के तुरंत बाद ही छुट्टी कर देनी चाहिए थी एवं आपराधिक गुनाह के कालकोठरी में बंद होना चाहिए था. वे सभी आज भी खुले में घुम रहे है.

    क्यों खैर मनाएंगे 10 मासूमों के हत्यारे : एड. सारंग कोतवाल

    एड. सारंग कोतवाल का मानना है कि इस पूरे मामले में अब तक चार्ज शीट दायर न होना अपने आप में बताता है कि जांच एजेंसी पर भारी दबाव है. उसने अब तक केवल घटना के दूसरे हिस्से की जांच किया है. जबकि आरंभिक हिस्से को भूला दिया है. जिन्होंने इनक्यूबेटर सप्लाई किया. जिन पर  इनक्यूबेटर मेंटेनेंस की जिम्मेदारी थी. आग क्यों लगी? इसकी जांच की दिशा में कोई काम नहीं हुआ है.

    घोर लापरवाही का नतीजा

    नवजात गहन देखभाल युनीट  में हर वक्त चौकन्ना रहने की जरूरत होती है. संभावना है कि हादसा 1 बजे के लगभग ही शार्ट सर्किट के बाद जब वायरिंग जलने लगी. धुंआ से कक्ष को भरने में आधे घंटे का बित चुका था. यही कारण था कि जब धुंए निकालता देख युनीट का दरवाज़े खोलने का प्रयास हुआ. गर्म धुंए की वजह से भीतर जाना संभव नहीं था. आधे से पौन घंटे का वक्त बित चुका था. उसके बाद फायर बिग्रेड को बुलाया गया.

    अस्पताल बनी थी पुलिस छावनी

    जैसे जैसे हादसे की खबर शहर में फैली थी. घटना की तीव्रता को देखते हुए पुलिस ने जिला अस्पताल को घेर लिया. इसके बाद लगभग 2 महीने तक चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात रही. इसके अलावा अस्पताल की ओर आ रही सड़कों को बैरेकेटिंग से बंद कर दिया गया.

    “सरकारी”, को बचा लिया “सरकार” ने ?

    अग्निकांड जिस अस्पताल में घटा. वहीं मौजूद कर्मचारी अधिकारियों से चर्चा करने पर बेहद आसानी से पता चलता है कि अग्निकांड के लिए कौन कितना जिम्मेदार था? कोरोना काल में इन्ही कोरोना योद्धाओं ने समाज से बेहद सम्मान एवं प्यार हासिल किया था. लेकिन अब अस्पताल के यह लोग स्वयं को शर्मसार महसूस करते है. इनकी माने समिति के गठन एवं तरीके पर प्रश्नचिन्ह लगाया जा सकता है. संदेह स्वाभाविक है कि कहीं “सरकारी को “सरकार” बचा तो नहीं बचा लिया.

    9 जनवरी की रात 1 बजे  भंडारा जिला अस्पताल के नवजात गहन देखभाल यूनिट में लगी आग में 10 बच्चों की झुलस कर मौत हुई. जबकि सुरक्षा कर्मियों की जांबाजी एवं फायर बिग्रेड यूनिट के प्रयासों की वजह से 7 शिशुओं को बचाया जा सका. इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था. सुबह होते होते स्वास्थ्य उप संचालक संजय जायसवाल भी भंडारा पहुंच चुके थे.

    स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने जिला प्रशासन से घटना की जानकारी ली. घटना के बारे में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जिलाधिकारी संदीप कदम एवं जिला शल्य चिकित्सक प्रमोद खंडाते के साथ फोन पर बात की थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी बडे नेताओं ने घटना पर शोक व्यक्त किया था. मुख्यमंत्री पीड़ित परिजनों से मिलने पहुंचे एवं पीड़ितों को आर्थिक सहायता की घोषणा की थी.

    हादसे की घडी

    आग लगी 1.20

    पुलिस पहुंची 1.40 बजे

    फायर बिग्रेड को जानकारी 1.59 बजे

    फायर बिग्रेड टीम पहुंची 2.05 बजे

    एसपी जाधव पहुंचे 2.10 बजे

    जिलाधिकारी कदम पहुंचे 2.20 बजे

    नवभारत टीम पहुंची 3.10 बजे