The city's first animal electric incinerator will start in Mumbai, plans to set up an area of 2500 sq.
File

    मुंबई : फरवरी महीने में होने वाले चुनाव (Election) से पहले वॉर्डों के परिसीमन (Delimitation) को लेकर बीजेपी (BJP)परेशान है। खबर है कि बीएमसी प्रशासन (BMC Administration) ने चुनाव आयोग (Election Commission) को परिसीमन की जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें 75 सीटों की बाउंड्री (Boundaries) इधर से उधर की गई है। जिसमें 50 सीटें ऐसी हैं, जहां बीजेपी को भारी नुकसान हो सकता है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि महाविकास आघाडी ने चुनाव से पहले बीजेपी के 50 सीटों का ‘खेला’ कर दिया है।

    शिवसेना को हर हाल में बीएमसी की सत्ता अपने पास रखनी है। इस बार शिवसेना मिशन मुंबई महानगरपालिका के तहत अपनी रणनीति बनानी शुरु कर दी है। पिछली बार वर्ष 2011 में हुए जनगणना के आधार पर वॉर्डों का परिसीमन किया गया था। उस समय परिसीमन को लेकर कांग्रेस का कहना था कि 65 सीटों पर धर्म और भाषा के आधार पर बाउंड्री को बदला गया था। उन 65 सीटों में बीजेपी को 42 और शिवसेना को 23 अतिरिक्त सीटों का फायदा हुआ था। शिवसेना को कुल 84 सीटें मिली थी। मोदी लहर पर सवार बीजेपी को पहली बार बीएमसी में 82 सीटें हासिल हुई थी।

    महाविकास आघाडी खुश

    राज्य में तीन दलों की सरकार बनाने के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह से बदल गया है। पिछली बार राज्य की सत्ता में बीजेपी की धमक थी, आरोप लगे थे कि बीएमसी चुनाव को अपने तरीके से हैंडल किया। बाउंड्री भी बदली और जमीनी स्तर पर प्रशासन का दबाव बना कर शिवसेना को कमजोर किया। कांग्रेस भी इसमें पीसी गई। कांग्रेस के सामने एक परेशानी और यह थी कि सत्ता से बाहर जाने के बाद उसके कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा हुआ था। संगठन में भी आंतिरिक विवाद चरम पर था। इसका भी उसका नुकसान हुआ। बीजेपी को इन परिस्थितियों का लाभ मिला और सीटों के मामले में वह शिवसेना के करीब पहुंच गई, लेकिन इस बार गणित बदला हुआ है।

    शिवसेना की ताकत बढ़ी

    इस बार राजनीतिक परिस्थिति भी शिवसेना के साथ है। हालांकि राज्य की सत्ता में साथ होने के बावजूद कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी। संभव है कि शिवसेना और एनसीपी मिल कर चुनाव लड़ें। एनसीपी-शिवसेना के एक साथ आने से मुंबई में उनकी ताकत बढ़ेगी। बीजेपी की स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि सत्ता के बाहर जाने के बाद उसके कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा हुआ है। मुंबई बीजेपी में भी आंतरिक घमासान तेज है। विधायकों सासंदों की अलग-अलग लॉबी है। संगठन से बिल्कुल तालमेल नहीं है। इसका भी उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    2017 में अनाप-सनाप हुए परिसीमन पर हमारी आपत्ति थी। हमने जिन 65 वॉर्डों में परिसीमन के समय गड़बड़ी की गई थी उसे सुधारा गया है। कौन से वॉर्डों में संशोधन हुआ है जब अपत्ति और सुझाव के लिए आएगा तब पता चलेगा।

    -रवि राजा, विरोधी पक्ष नेता, बीएमसी

    शिवसेना को डर है कि आने वाले चुनाव में उसे करारी शिकस्त मिल सकती है, इसलिए वॉर्डों की बाउंड्री में बदलाव कर रही है। यह मुंबईकरों के साथ धोखा है। हमने राज्य चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की है।

    -विनोद मिश्रा, पार्टी नेता, बीएमसी

    बीजेपी का वॉर्ड घोटाले का आरोप लगा कर बीजेपी चुनावी स्टंट कर रही है। चुनाव आयोग स्वतंत्र रुप से काम करता है। हमने 2017 में जीत हासिल की थी आगामी चुनाव में भी जीत हासिल करेंगे। बेबुनियाद आरोप लगाने से अच्छा है कि बीजेपी को लोगों का काम करना चाहिए।

    -किशोरी पेडणेकर, महापौर, मुंबई

    वर्तमान में इस प्रकार है नगरसेवकों की संख्या

    • शिवसेना 97
    • बीजेपी 83
    • कांग्रेस 29
    • एनसीपी 08
    •  समाजवादी पार्टी 06
    • एमआईएम 02
    • मनसे 01
    • निर्दलीय 01