गोसीखुर्द प्रकल्प: पीड़ितों को नहीं मिली उपयुक्त जमीन, मसला हल करें जिलाधिकारी- HC

    नागपुर. गोसीखुर्द प्रकल्प के लिए जमीन देने के बाद पीड़ितों का पुनर्वास करने के लिए उन्हें जमीन देने का भी निर्णय लिया गया था. पीड़ितों को जमीन भी आवंटित की गई किंतु वह उपयुक्त नहीं होने का कारण बताकर उन्होंने स्वीकार करने से इनकार कर दिया. टेकेपार प्रोजेक्ट बाधित पुनर्वास संघर्ष समिति की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह मामला उजागर हुआ. इसके बाद न्यायाधीश सुनील शुक्रे और न्यायाधीश अनिल पानसरे ने पीड़ितों को जमीन देने का मसला हल करने के आदेश जिलाधिकारी को दिए. अदालत ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं को जो जमीन चाहिए वह आवंटित नहीं की गई है. इस मसले का हल समन्वय से भी किया जा सकता है. इसमें जिलाधिकारी कार्यालय के प्रतिनिधि और याचिकाकर्ता आपस में बैठकर इसका समाधान खोज सकते हैं.

    रिपोर्ट पेश करें

    अदालत ने आदेश में कहा कि गोसीखुर्द प्रकल्प के बदले याचिकाकर्ताओं को जमीन देने के लिए वीआईडीसी ने भूमि चिन्हांकित की थी. यह जमीन रहने योग्य है या नहीं, इसकी छानबीन करने के लिए जिलाधिकारी किसी सक्षम अधिकारी को अपने प्रतिनिधि के रूप में भेज सकते हैं. याचिकाकर्ताओं के 2 प्रतिनिधियों के साथ जिलाधिकारी द्वारा चुने गए अधिकारी उस चिन्हांकित जगह का मुआयना कर सकते हैं. इसके बाद पूरे मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपनी होगी. रिपोर्ट मिलते ही समस्या के समाधान के लिए जिलाधिकारी दोनों पक्षों को बुला सकेंगे. यदि यह संभव नहीं हो सके तो रिपोर्ट के साथ इसकी जानकारी अदालत में प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए गए. 

    सड़क ऊंची करने का विरोध

    सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि टेकेपार गांव से जुड़ने वाला एप्रोच रोड हमेशा बारिश के दौरान डूबा रहता है जिससे लोगों को परेशानी होती है. इस परेशानी के हल के लिए सरकार ने  इसे ऊंचा करने का निर्णय लिया किंतु गांव के कुछ लोगों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है. इससे सड़क नहीं बन पा रही है, जबकि यह याचिकाकर्ता और गांव के लोगों के हित में ही है. इसके लिए ठेकेदार को कार्यादेश दिया गया किंतु उसके लोगों के साथ कुछ ग्रामीणों ने बुरा बर्ताव कर काम को रोक दिया. इसके बाद संबंधित विभाग ने पुलिस अधीक्षक से पुख्ता सुरक्षा की मांग की. अब तक बंदोबस्त का इंतजार है.

    उमरेड के एसडीओ और स्थानीय पुलिस निरीक्षक को भी इसकी जानकारी दी गई है. सुनवाई के बाद अदालत ने रोड का निर्माण पूरा करने के लिए याचिकाकर्ता और गांव वालों को सहयोग करने के आदेश दिए. ठेकेदार के कर्मचारियों पर हमला करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश पुलिस अधीक्षक को दिए. साथ ही काम पूरा करने के लिए वीआईडीसी से आवश्यक निधि लेकर 8 दिसंबर तक पुख्ता बंदोबस्त देने के भी आदेश पुलिस अधीक्षक को दिए.