ST BUS
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    नाशिक : जिले में एसटी कर्मचारियों (ST Employees) का आंदोलन जोर पकड़ रहा है और नाशिक डिपो (Nashik Depot) के साथ मनमाड (Manmad), मालेगांव (Malegaon) और नांदगांव (Nandgaon) के कर्मचारियों ने हड़ताल का बीड़ा उठा लिया है। राज्य सरकार में एसटी निगम के विलय की मांग को लेकर प्रदेश भर के कर्मचारी आक्रामक है। दिवाली पर हड़ताल का आह्वान करने से आम जनता असमंजस में है। नाशिक विभाग के सभी 13 डिपो के कर्मचारियों के आंदोलन में भाग लेने की उम्मीद है।

    नाशिक में एन.डी. रोड पर डिपो नंबर 1 के कर्मचारियों ने कल दोपहर से अचानक काम करना बंद कर दिया और संघर्ष संघ का गठन किया और आंदोलन में शामिल हो गए। प्रत्येक डिपो में इस संघ के कई सदस्य होते है। इससे नाशिक जिले में इस आंदोलन को गति मिलेगी। महाराष्ट्र राज्य कनिष्ठ वेतन कर्मचारी संघ द्वारा आहूत हड़ताल के अनुसार येवला डिपो के कर्मचारी भी आधी रात से हड़ताल में शामिल हो गए। नतीजतन, येवला डिपो से निकलने वाली बस सेवा बाधित हो गई। इसलिए, ऐन दिवाली की छुट्टी के दौरान यात्रियों को कठिनाई होने लगी है।

    कई कर्मचारियों ने कर ली आत्महत्या 

    मनमाड, मालेगांव और नांदगांव में एसटी कर्मचारियों ने आधी रात से फिर से हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के कारण बस स्टैंड में सन्नाटा पसरा रहा और एक भी बस डिपो से नहीं निकली। इस हड़ताल का सबसे बड़ा झटका उन कर्मचारियों समेत यात्रियों पर पड़ रहा है, जिन्हें हर रोज बस से आना जाना पड़ता है। हमने जो हड़ताल बुलाई है वह कर्मचारियों को कम वेतन मिलने के कारण है। कई कर्मचारियों ने आत्महत्या कर ली है और हम इस बात पर अड़े हैं कि हमारे लिए समय नहीं आना चाहिए और एसटी को राज्य सरकार में विलय कर दिया जाना चाहिए, एैसी कर्मचारियों ने चेतावनी दी है। 

    यात्रियों को असुविधा 

    यात्रियों का कहना है कि एसटी के आंदोलन से पूरे राज्य भर में यात्रा करने के लिए असुविधा हो रही है। दीपावली की छुट्टियों में कई नौकरी पेशा लोग अपने परिवार के साथ अपने गांव गए हुए है। वे अपने काम पर वापस नहीं लौट सकते। ऐसे में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई आवाजाही कर रहा है। राज्य सरकार को भी एसटी कर्मचारियों की न्याय की मांग माननी चाहिए और उन्हें उनकी परेशानियों से मुक्ति दिलानी चाहिए।