मोतीवाला कॉलेज अतिक्रमण पर चला नाशिक महानगरपालिका का हथौड़ा

    सातपुर : नाशिक महानगरपालिका (Nashik Municipal Corporation) के अतिक्रमण निर्मूलन विभाग (Encroachment Removal Department) ने अनधिकृत निर्माण कार्य (Unauthorized Construction Work) और अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई (Action) तेज कर दी है। इसके तहत मोतीवाला कॉलेज (Motiwala College) के अनधिकृत निर्माण कार्य पर महानगरपालिका ने हथौड़ा (Hammer) चलाते हुए कैंटींग, वाहन पार्किंग शेड, रिह्रयाबिलेशन सेंटर आदि तोड़ दिया। यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित होने का आरोप मोतीवाला कॉलेज के संचालक फरहान मोतीवाला ने किया। महानगरपालिका कमिश्नर रमेश पवार की सूचना के बाद सातपुर विभागीय कार्यालय ने सप्ताह में तीसरी कार्रवाई की। ध्रुव नगर स्थित मोतीवाला कॉलेज ने अपने परिवार में कुछ अंतर्गत बदलाव किए। इसके लिए उन्होंने महानगरपालिका की अनुमति नहीं ली। इस बारे में एक नगरसेवक ने शिकायत की थी। 

    कॉलेज प्रशासन ने अनधिकृत निर्माण कार्य नहीं हटाया

    इस बारे में महानगरपालिका ने मोतीवाला कॉलेज को नोटिस भेजकर अनधिकृत निर्माण कार्य हटाने की अपील की थी। परंतु कॉलेज प्रशासन ने अनधिकृत निर्माण कार्य नहीं हटाया। इसके बाद महानगरपालिका के अतिक्रमण निर्मूलन विभाग की उपायुक्त करुणा डहाले के मार्गदर्शन में नाशिक पश्चिम विभागीय कार्यालय, सातपुर विभागीय कार्यालय और सिडको विभागीय कार्यालय के पथक ने पुलिस बंदोबस्त में अनधिकृत निर्माण कार्य पर हथौड़ा चलाया। लगभग दो घंटे तक यह कार्रवाई शुरू थी। कार्रवाई किए गए पथक में नितिन नेर, मयूर पाटिल, शिवाजी काले, गोकुल पगारे, तानाजी निगल, मिलिंद जाधव, मयूर काले, सत्यम शिंदे, उमेश खैरे, सचिन सणस, विजय सपकाल, प्रमोद आवाले, गौतम खरे, संजय पाटिल, दिलीप मोकाशी सहित अन्य महानगरपालिका के अधिकारी-कर्मचारी शामिल है। 

    कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया

    इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए मोतीवाला कॉलेज के संचालक फरहान मोतीवाला ने इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी व्यक्त करते हुए यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित होने का आरोप करते हुए कहा, महानगरपालिका ने मुख्य सड़क पर डिवाइडर डालने से विद्यार्थी और मरीजों को बस पकड़ने के लिए परेशानी हो रही थी। साथ ही डिवाइडर में अंतर न होने से ऍम्ब्युलन्स को मोड़ कर आना पड़ता था। इसलिए हमने डिवाइडर को विरोध किया था। कोरोना काल में मरीजों के लिए पत्रे का शेड बनाया था। एक बार फिर कोरोना की लहर आने की संभावना से शेड को नहीं हटाया था। यह शेड जुलाई महीने में निकालने के बारे में महानगरपालिका को पत्र भी दिया था। कॉलेज के सामने डिवाइडर डालने का विरोध करने से ही यह कार्रवाई की गई है। इसके चलते ट्रस्ट अर्थात पब्लिक का ही नुकसान हुआ है। कोरोना काल में किए गए अच्छे कार्य का इस तरह से मुआवजा देने से उन्होंने महानगरपालिका के आभार भी व्यक्त किए।