नासिक की इस सब्जी मंडी का इस्तेमाल शौचालय के रूप में किया जा रहा

    नासिक : गंगा घाट पर लगी पारंपरिक सब्जी मंडी (Vegetable Market) को हटाकर गणेशवाडी इलाके में साढ़े छह करोड़ रुपए की लागत से सब्जी मंडी लगाई गई, लेकिन, दुकानदारों (Shopkeepers) के विरोध के चलते कई दिनों से बंद पड़ी इस सब्जी मंडी का उपयोग अब शौचालय (Toilets) के रूप में किया जा रहा है, ऐसे में इक्का-दुक्का सब्जी विक्रेता भी इस बदबू का सामना कर रहे हैं। 

    कुंभ मेले के दौरान गंगा घाट स्थित सब्जी मंडी को प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से हटा दिया था। इस समय गंगा घाट पर 650 से अधिक लाइसेंसी सब्जी विक्रेता व्यवसाय कर रहे थे। सिंहस्थ के बाद भी इन वेंडरों को उस स्थान पर कारोबार करने से रोके जाने के बाद मामला कोर्ट में चला गया। मामला अब तक लंबित है। इस दौरान नासिक महानगरपालिका ने भारी पुलिस बल के साथ गणेशवाडी में गाडगे महाराज पुल के पास खड़ी झुग्गी को हटाकर उसके स्थान पर सब्जी मंडी का निर्माण कराया, जिस पर करीब साढ़े छह करोड़ रुपए खर्च किए गए। 

    मंडी बनने के बाद गंगा घाट पर बेचने वालों को नई मंडी में व्यापार करने के लिए बुलाया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, इसलिए पिछले कई वर्षो से इस मंडी पर भिखारियों, आवारा और नशेड़ियों का कब्जा हो गया है। अब 30 से 40 प्रतिशत बाजार पर सब्जियों के साथ-साथ फूल वालों का कब्जा है, लेकिन बाकी पर फिर से भिखारियों का कब्जा है। चूंकि ये लोग बाजार परिसर में बने शौचालय में जा रहे हैं, इसलिए इलाके में दुर्गंध है। इसलिए यहां पैसा देकर कारोबार करने वालों को भी दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। खास बात यह है कि आस-पास एक नहीं बल्कि दो सुलभ शौचालय हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल किए बिना खुले में शौच कर रहे हैं। 

    खुले में शौच करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई 

    केंद्र और राज्य सरकारें शौच मुक्त मुक्त गांवों की अपील कर रही हैं, जिसके लिए सब्सिडी पर भारी खर्च भी किया जा रहा है। यह भी घोषणा की गई है कि राज्य खुले में शौच से मुक्त हो गया है, लेकिन नाशिक जैसे ‘स्मार्ट’ शहरों में ही इस योजना को खारिज किया जा रहा है। विक्रेताओं की मांग है कि खुले में शौच करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए। नासिक महानगरपालिका की ओर से यहां कारोबार करने के लिए जगह मुहैया कराने के बाद कुछ लोगों ने इस दृष्टि से कदम भी बढ़ाए थे, इसके लिए पांच हजार रुपए प्रतिमाह किराया भी तय किया गया था, लेकिन बाद में यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।  नासिक महानगरपालिका की ओर से बनाई गई इस सब्जी मंडी पर खर्च की गई धनराशि पानी में चली गई, लेकिन इतनी बड़ी धनराशि के व्यर्थ चली जाने का किसी को रंच मात्र भी अफसोस नहीं है।