गृहनिर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड को निलंबित करो, भाजपा नेता किरीट सोमैया ने की मांग

    ठाणे : भाजपा नेता (BJP Leader) किरीट सोमैया (Kirit Somaiya) ने राज्यपाल को पत्र लिखकर राज्य के गृह निर्माण मंत्री ( Home Construction Minister) जितेंद्र आव्हाड (Jitendra Awhad) को मंत्रिमंडल से निलंबित करने की मांग की है। सोमैया का कहना है कि इंजीनियर अनंत करमुसे प्रकरण, में तीन पुलिस कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। लेकिन गृहनिर्माण मंत्री पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 

    गौरतलब है कि इंजीनियर अनंत करमुसे मारपीट प्रकरण में गुरुवार को ही ठाणे की वर्तक नगर पुलिस ने गिरफ्तार किया था और फिर दो घंटे बाद उन्हें मामूली मुचलके पर जमानत मिल गई थी। इस घटनाक्रम के बाद इस शुक्रवार को भाजपा नेता किरीट सोमैया ने अनंत करमुसे के घोड़बंदर रोड के आनंद नगर स्थित घर पर जाकर उनसे मुलाकात की। सोमैया ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए हुए  करमुसे के एक ट्वीट को लेकर राज्य के गृहनिर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड के समक्ष उनके ही सुरक्षा रक्षकों ने जबरन पिटाई की थी। इस प्रकरण में तीन पुलिस वाले निलंबित किए गए थे। ऐसे में इस मारपीट प्रकरण में गृहनिर्माण मंत्री आव्हाड को गिरफ्तार कर तुरंत जमानत दे दी गई। जोकि पूरी तरह गलत है। 

    मुख्यमंत्री ठाकरे और शरद पवार ने ही आव्हाड को किया है आगे 

    सोमैया ने कहा कि पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, मनसूख हिरण अपहरण और हत्या, 100 करोड़ रूपए की वसूली प्रकरण के बाद से एक-एक मामलों का खुलासा हो रहा है। इसलिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एनसीपी सुप्रीमों शरद पवार ने उनके विरुद्ध कोई कुछ न बोल पाए इसलिए दोनों ने आव्हाड को आगे किया है। इसलिए आव्हाड ने इस प्रकार अपने ही बंगले पर बुलाकर एक इंजिनियर की पिटाई की और दहशत निर्माण करने का प्रयास किया। इसलिए ठाकरे सरकार माफियाओं की सरकार बनकर रह गई है। सोमैया ने कहा कि करमुसे के प्रकरण में तीन कांस्टेबल निलंबित किये जा चुके है, परंतु जितेंद्र आव्हाड मंत्री है और उन्हें बचाने का प्रयास सरकार कर रही है। इसलिए उन्होंने इस संदर्भ में आव्हाड पर कार्रवाई करने के लिए राज्यपाल को पत्र देना पड़ा है। 

    इंजिनियर करमुसे ने की सीबीआय से जांच की मांग 

    वहीं पीड़ित इंजिनियर अनंत करमुसे ने कहा कि लड़ाई तो अब शुरू हुई है। इसलिए उसने खुद के ऊपर हुए हमले की जांच सीबीआई द्वारा किए जाने की मांग की है। साथ ही इस प्रकरण में पिछले एक वर्ष पहले उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की बात भी कही और एक मंत्री को गिरफ्तार कर कुछ ही घंटों में जमानत देने को लेकर खेद भी जताया।