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    मलकापुर. भूमि अभिलेख कार्यालय में तोड़फोड़ करने के प्रकरण में अतिरिक्त जिल्हा व सत्र न्यायालय के तदर्थ न्यायाधीश एस.वी. जाधव ने एक आरोपी को दोषी पाकर छह माह की सजा और चार आरोपियों को सबूतों के अभाव में निर्दोष बरी कर दिया. प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम देवधाबा के तुकाराम बोरसे के खेत की गिनती 25 मई 2016 को निश्चित की गयी थी. उस जगह का शुल्क भी भरा गया था.

    गिनती के दिन आस पड़ोस के किसानों को उपस्थित रखकर मोजणी के लिए लगने वाली सामग्री और मजदूरो के लिए खर्च भी किया गया था. लेकिन उस जगह गिनतीदार शशिकांत इंगले नहीं पहुंचे. जिस कारण दोपहर के समय उक्त किसान का बेटा जगदीश बोरसे यह भूमि अभिलेख कार्यालय में जाकर उस संदर्भ में अधीक्षक दादाराव सोनवणे से पूछताछ करने गया तब सोनवणे ने सही जवाब न देते हुए कार्यालय से भगा दिया था. जिस कारण जगदीश बोरसे ने लोकनेता एड.हरीश रावल से संपर्क कर शिकायत दर्ज की.

    एड.हरीश रावल बाहर गांव होने से उन्होंने मनसे जिलाध्यक्ष (परिवहन) गजानन ठोसर को उक्त मामले में ध्यान देकर उक्त किसान को न्याय दिलवाने को कहा. उस नुसार गजानन ठोसर, राहुल जाधव, शाकिर खान, शरद खराटे, जगदीश बोरसे ने भूमि अभिलेख कार्यालय में जाकर उस अधीक्षक से इस संबंध में पूछने पर उन्होंने समाधानकारक जवाब न देने से गजानन ठोसर के नेतृत्व में आंदोलन किया गया.

    उक्त घटना की शिकायत दादाराव सोनवणे ने 25 मई 2016 को शहर पुलिस थाने में दर्ज कराई थी. उक्त शिकायत पर पुलिस ने उक्त सभी के खिलाफ भादंसं की धारा 143, 147, 353, 149, 186, 149 तथा 3(2)(ई) सार्वजनिक संपत्ति का विरूपण प्रतिबंध कानून 1984 एव 135 मुंबई पुलिस कानून के तहत दोषारोप पत्र दाखल कर न्यायालय ने दोषारोप निश्चित किया था.

    करीब छह साल तक चले इस न्यायालीन प्रक्रिया में सरकार पक्ष व्दारा कुल छह व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए. दोनों पक्ष का युक्तिवाद सुनकर सरकारी पक्ष व्दारा एड.विवेक बापट ने किए युक्तिवाद को ग्राह्य मानकर आरोपी जगदीश बोरसे को धारा 353 के तहत छह माह की सजा एव एक हजार रू. जुर्माना, जुर्माना न भरने पर सात दिन की सजा एवं सार्वजनिक संपत्ति का विरूपण प्रतिबंध कानून की धारा 3 नुसार छह माह की सजा एव ढाई हजार रू. का जुर्माना, जुर्माना न भरने पर पंधरा दिन की कैद,

    ऐसी सजा अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायालय के तदर्थ न्यायाधीश एस.वी. जाधव ने सुनाई. इसी तरह मनसे जिलाध्यक्ष गजानन ठोसर, राहुल जाधव, शाकीर खान, शरद खराटे की ओर से एड.जी.डी. पाटिल ने किए युक्तिवाद को ग्राह्य मानकर उक्त मामले से उन्हें निर्दोश बरी कर दिया गया. इस मामले की पैरवी अधिकारी ए.एस.आई. संतोष कोल्हे ने काम संभाला.