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  • किसानों की आर्थिक लूट, कृषि विभाग की अनदेखी

पुसद (सं). जून के सप्ताह की शुरुआत में ही किसान बुआई की तैयारी में लग जाते हैं. बारिश का मौसम शुरू होते ही किसानों की बीज के लिए कृषि केंद्र पर भीड़ उमड़ जाती है, किंतु विज्ञापन की दुनिया में किसान, जनता के बीच जिस बीज की चर्चा है वही बीजों की अधिक मांग करते हैं. इसका फायदा उठाकर कृषि केंद्र के चालक, व्यापारी कृत्रिम कमी कर रहे हैं.

किसानों को महंगे दामों पर बेचकर उनकी लूट की जा रही है. इस तरह की घटना शेंबालपिंपरी के एक कृषि केंद्र में हुई है. एक किसान का कृषि केंद्र के मालिक से एशियन 9305 का सोयाबीन बीज फोन द्वारा 6 बैग 3,600 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से सौदा तय हुआ था. खरीद के लिए संबंधित किसान कृषि केंद्र में गए थे तो 3,700 रुपये प्रति बैग खरीदना पड़ा था. व्यापारी बातों से मुकर गया. वहीं लूट हर साल बीज पर और दवाओं पर भी की जाती है. ऐसे में किसान बेहद परेशान है.

बीज के लिए भटक रहे किसान 

कर्ज के बोझ मे दब रहा है. हर साल होने वाली बेमौसम बारिश के कारण किसान अपने हाथ में आने वाली फसल को नहीं खा पा रहा है. किसानों की स्थिति ऐसी है कि अब किसान थक गए हैं. इसके लिए भ्रष्ट कृषि अधिकारी जिम्मेदार हैं. सरकारी बीज कंपनी महाबीज द्वारा सोयाबीन, कपास, तुअर का बीज अनुदान पर उपलब्ध कराया गया है़ परंतु इस बीज के संदर्भ में किसानों में संदेह बना हुआ है, जिससे किसान सरकार बीज खरीदी से तौबा करते नजर आ रहे है़ं  सरकारी बीज का स्टाक होने के बावजूद भी उसकी मांग कम है़