वैक्सीन में झोल, दूसरी डोज में देर क्यों

    देश की जनता जानना चाहती है कि ऐसी क्या बात हो गई कि अचानक केंद्र सरकार ने कोविशील्ड वैक्सीन (Covishield Vaccine) की दूसरी डोज लेने की समय सीमा 28 दिन से बढ़ाकर 8 सप्ताह कर दी? ऐसा गैप बढ़ाने से तो खतरा बढ़ेगा. पहली डोज लेने वाला इस दौरान कोरोना संक्रमित (Coronavirus) हो गया तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? केंद्र सरकार के नए निर्देश के पीछे कौन सा ओचित्य है, यह जनसामान्य के लिए समझ पाना मुश्किल है. सरकार ने इसकी जो वजह बढ़ाई है, वह विश्वसनीय नहीं लगती. केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण (Rajesh Bhushan)ने राज्यों को लिखी चिट्ठी में कहा कि नए अध्ययन से पता चला है कि बढ़ी हुई समय सीमा में टीके का असर ज्यादा होता है. इसलिए कोविशील्ड की दूसरी डोज की समय सीमा को 4-6 सप्ताह से बढ़ाकर 6-8 सप्ताह कर दिया गया है. राज्य सरकारें अपनी कोविड प्रबंधन टीम को इससे अवगत कराएं ताकि लोगों को कोविशील्ड की दूसरी डोज बढ़ी हुई समय सीमा में लगाई जा सके.

    वास्तविकता क्या है

    कोविशील्ड निर्माता अदर पूनावाला ने कुछ समय पूर्व कहा था कि इस वैक्सीन के लिए जरूरी सामग्री विदेश से आती है और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसका उत्पादन प्रभावित हो सकता है. हकीकत यह है कि कोविशील्ड का उत्पादन कम होने से दूसरे डोज को लेने की अवधि बढ़ाई गई है. दोनों डोज के बीच गैप बढ़ाने से अधिक लोगों को पहली डोज लगाई जा सकेगी.

    PM ने विश्वास पैदा करने की कोशिश की थी

    कोविशील्ड वैक्सीन, को वैक्सीन की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली है. इतने पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कोवैक्सीन लेकर उसके प्रति जनता में विश्वास पैदा करने की कोशिश की थी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप आन इम्युनाइजेशन (एनटीएजीआई) और नेशनला एक्सपर्ट ग्रुप आन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड-19 (नेगवैक) की सिफारिश पर वैक्सीन की दूसरी डोज (Covishield Second Dose) लेने की समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया. इन समूहों ने वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल से मिले वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर कहा कि यदि 6 से 8 सप्ताह के भीतर दूसरी डोज ली जाती है तो कोरोना से बेहतर बचाव हो सकता है.

    अन्य देशों में परीक्षण

    यूके, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में किए गए परीक्षण से पता चला कि वहां एजेडडी 1222 वैक्सीन की दूसरी डोज जब 6 सप्ताह से पहले दी गई तो उसका असर 54.9 प्रतिशत रहा लेकिन जिन लोगों को 6 से 8 सप्ताह के बीच दूसरी डोज दी गई उन पर 59.9 प्रतिशत असर पड़ा. जिन्हें 9 से 11 सप्ताह में सेकंड डोज दी गई उन पर 63.7 प्रतिशत असर पड़ा. यह परीक्षण रिपोर्ट लान्सेट को फरवरी में सौंपी गई. इसमें यह भी कहा गया कि 12 सप्ताह या ज्यादा समय के बाद दूसरी डोज लेने से 82.4 प्रतिशत असर पड़ा. कोविशील्ड सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया की वैक्सीन है जो कि एस्ट्राजेनेका व आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित एजेडडी 1222 वैक्सीन का भारतीय रूप है.

    एनटीएजीआई के डा. एन के अरोरा की राय है कि भारत में वैक्सीन की दूसरी डोज के लिए 12 सप्ताह का गैप नहीं दिया जा सकता. इस दौरान संक्रमण फैल सकता है. हम नहीं चाहते कि ऐसा हो. अब यह सुविधा है कि लोग 28 से 56 दिनों के भीतर वैक्सीन की दूसरी डोज ले सकते हैं.