Nanda Saptami
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    -सीमा कुमारी

    सनातन धर्म में मार्गशीर्ष मास को अत्यंत पवित्र महीना माना जाता है। इस मास में पड़ने वाले सभी व्रत और त्योहारों का बड़ा महत्व है। हर साल मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ‘नंदा सप्तमी’ (Nanda Saptami) का पावन पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष मार्गशीर्ष शुक्ल ‘नंदा सप्तमी’ आज यानी 30 नवंबर, बुधवार को है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नंदा सप्तमी के दिन सूर्यदेव, भगवान श्री गणेश और नंदा देवी की पूजा करने से भक्तों को ज्ञान की प्राप्ति होती है। साथ ही भक्तों को देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि नंदा देवी माता पार्वती का ही अंश हैं। इसलिए इस दिन इनकी पूजा करने से भक्तों अपार तेज का भी वरदान मिलता है। आइए जानें हैं कब है नंदा सप्तमी, शुभ मुहूर्त और इस व्रत का महत्व।

    तिथि  

    पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 29 को सुबह 11:04 पर शुरू होगा जो अगली सुबह यानि 30 नवम्बर 2022 के दिन सुबह 8:58 पर समाप्त हो जाएगा, उदय तिथि के अनुसार यह 30 नवम्बर 2022, बुधवार के दिन रखा जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:10 से 6:04 के बीच रहेगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में सूर्यदेव को अर्घ्य जरूर दें और परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

    पूजा विधि

    मान्यताओँ के अनुसार, इस दिन पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान-ध्यान कर सूर्य को अर्घ्य दें और इस क्रिया के लिए तांबे के लौटे में लाल पुष्प, जल, अक्षत और रोली डाल लें। फिर ‘ॐ सूर्याय नम:’ मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें। इस दिन व्रत रखने का विशेष महत्व है। इसलिए सूर्य पूजा के बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान गणेश और माता नंदा देवी की पूजा करें। मान्यता है कि इनकी पूजा करने से जीवन सुखमय रहता है और वैवाहिक जीवन में आ रही अड़चनें दूर हो जाती हैं।

    महत्व  

    नारद पुराण के अनुसार इस दिन भगवान सूर्य के लिए ‘मित्र व्रत’ करने का वर्णन हैं। पुराणों के वर्णित है कि कश्यप ऋषि के तेज और अदिति के गर्भ से मित्र नाम के सूर्य ने जन्म लिया था। इसलिए नंदा सप्तमी के दिन सूर्य के मित्र रूप की पूजा की जाती हैं। मान्यता है जो इस तिथि पर दिनभर व्रत रखकर, सूर्य की उपासना और फिर ब्राह्मण भोजन करवाता है उसके आत्मविश्वास और आयु में वृद्धि होती है और बीमारियों से छुटकारा मिलता है।  तमाम तरह के दोषों का नाश होता है। नंदा सप्तमी में गर्म कपड़े, गुड़, लाल चंदन, तांबे के बर्तन का दान करने से बुद्धि और बल में बढ़ोत्तरी होती है।