विपक्ष ने दी रोकने की अर्जी सेंट्रल विस्टा पर चलेगी मोदी की मर्जी

    पड़ोसी ने हमसे कहा, “निशानेबाज, किसी भी सृजन या निर्माण को हरगिज नहीं रोकना चाहिए. शाहजहां ने ताजमहल और लाल किला बनाया तो किसी ने नहीं रोका-टोका. प्रधानमंत्री मोदी सेंट्रल विस्टा बनवा रहे हैं तो उस दिव्य और भव्य निर्माण को लेकर विपक्षी नेता क्यों टोकाटाकी कर रहे हैं? जिन लोगों ने राष्ट्र की गरिमा बढ़ाने के लिए खुद कोई ऐतिहासिक निर्माण कार्य नहीं किया और अंग्रेजों के बनाए हुए राष्ट्रपति भवन, संसद भवन से ही संतुष्ट होकर रह गए, वे ही नमो के निर्माण में रोड़ा अटका रहे हैं.’’

    हमने कहा, ‘‘मोदी तो सिर्फ सेंट्रल विस्टा के निर्माता कहलाएंगे लेकिन देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है. नेहरू ने भाखड़ा नंगल बांध तथा भिलाई, दुर्गापुर और बोकारो के स्टील प्लांट बनवाए थे और इन स्थानों को आधुनिक भारत का तीर्थ कहा था. वास्तव में बनाने का सिलसिला बहुत पहले से चला आ रहा है. कुतुबुद्दीन ऐबक ने कुतुबमीनार बनाई. राजपूत राजाओं ने राजस्थान में और छत्रपति शिवाजी महाराज ने महाराष्ट्र में मजबूत किले बनवाए. अवध के नवाब आसफुद्दौला को लखनऊ में इमामवाड़ा और भूलभुलैया बनवाने का श्रेय है. वहां अकाल पड़ा था तो लोगों को रोजगार देने के लिए इमारत बनाने का काम दिया था, बदले में उन्हें अनाज दिया जाता था. तब कहा जाता था- जिसे न दे मौला, उसे दे आसफुद्दौला.

    मजदूर दिन में जो इमारत बनाते, उसकी दीवार को रात में कहीं न कहीं तोड़ दिया जाता था ताकि लोगों को लगातार काम मिलता रहे. ऐसा करते-करते चक्करदार गलियों वाली भूलभुलैया बन गई जहां जाकर इंसान रास्ता भटक जाता है.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, क्या मोदी की महत्वाकांक्षी कृति सेंट्रल विस्टा भी ऐसी ही भूलभुलैया है?’’ हमने कहा ‘‘यह तो बनने के बाद पता चलेगा. अभी तो 20,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की इस योजना को रोकने और वह धन कोरोना महामारी से निपटने में लगाने की मांग विपक्ष के 1 दर्जन विपक्षी दलों ने की है. अर्जी विपक्षी पार्टियों ने दी है लेकिन मर्जी तो मोदी की ही चलेगी. वे अपने मन की बात पूरी किए बिना नहीं मानेंगे.’’