Shani Dev

    -सीमा कुमारी

    आज ‘शनि जयंती’ (Shani Jayanti) है। यह पावन पर्व यानी ‘शनि जयंती’ हर वर्ष ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि के दिन मनाई जाती है। यह त्योहार हिन्दू भक्तों के लिए बेहद शुभ एवं पवित्र माना जाता है और एक ख़ास बात है कि इसी दिन ‘वट सावित्री व्रत’ और साल का पहला ‘सूर्य ग्रहण’ भी लगने जा रहा है। बताया तो ये भी जा रहा है कि जो व्यक्ति शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती से परेशान हैं, उनके लिए ‘शनि जंयती’ का पावन दिन बहुत ही शुभ एवं फलदायी है।

    शास्त्रों के अनुसार,  शनिदेव सूर्यदेव के पुत्र हैं। लेकिन, पिता और पुत्र में बैर की भावना सदैव बनी रहती है। सभी ग्रहों में शनि सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। ये किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। शनि एक राशि में दोबारा 30 साल के बाद ही आते हैं। ज्योतिष और आस्था के नजरिए से देखा जाए तो शनि देव का विशेष महत्व होता है।

    ‘शनि जयंती’ के पावन अवसर पर जानें  शनिदेव से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें…

    • शनिदेव सभी नौ ग्रहों में सबसे श्रेष्ठ एवं उत्तम ग्रह है। शनिदेव की इन्हीं श्रेष्ठ आचरण के कारण भगवान शिव से आशीर्वाद मिला है। इनकी दृष्टि से मनुष्य क्या देवता भी भयभीत रहते हैं। ज्योतिष-शास्त्र में तमोगुण की प्रधानता वाले क्रूर ग्रह शनि को दुख का कारक बताया गया है। वह देव, दानव और मनुष्य आदि को त्रास देने में समर्थ हैं। शायद इसीलिए उन्हें दुर्भाग्य देने वाला ग्रह माना जाता है। किंतु वास्तव में शनिदेव देवता हैं। मनुष्य के दुख का कारण स्वयं उसके कर्म हैं। शनि तो निष्पक्ष न्यायाधीश की भांति बुरे कर्मों के आधार पर वर्तमान जन्म में दंड भोग का प्रावधान करते हैं।
    • ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, शनि की बुरी दृष्टि कभी भी 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर नहीं पड़ती है। इसके पीछे का कारण यह है कि पिप्पलाद मुनि ने युद्ध में शनि को परास्त कर दिया और इस शर्त पर छोड़ा कि वे 12 वर्ष तक की आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं देंगे।
    • शास्त्रों के अनुसार, शनि की कुदृष्टि का प्रमुख कारण शनिदेव की पत्नी द्वारा दिए गए शाप के कारण है। एक बार शनिदेव की पत्नी पुत्र की लालसा में उनके पास पहुंची लेकिन शनिदेव कठिन तपस्या में लीन थे। इससे आहत होकर पत्नी ने शनिदेव को शाप दिया कि जिस पर भी आपकी दृष्टि पड़ेगी उसका सबकुछ नष्ट हो जाएगा।
    • शनिदेव का रंग काला है। इसके पीछे का कारण यह है कि शनिदेव के पिता का नाम सूर्यदेव और माता का नाम छाया है। छाया भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थीं और वह अपने गर्भ में पल रहे शनि की चिंता किए बगैर हमेशा भगवान शिव की तपस्या में लीन रहती थीं। इस कारण से न तो वह खुद अपना और न ही गर्भ में पल रहे अपने बच्चे का ध्यान रख पाती थीं। जिसके कारण से शनि काले और कुपोषित पैदा हुए।