आरोप-प्रत्यारोप में जुटा पक्ष-विपक्ष, विकास पर ध्यान नहीं, सिर्फ घटिया राजनीति जनता देख रही….

    किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि महाराष्ट्र जैसे देश के गौरवशाली, प्रगतिशील और उच्च सांस्कृतिक परंपराओं वाले राज्य को यह दिन देखने पड़ेंगे. आज राजनीति अत्यंत निम्न स्तर पर जा पहुंची है और दोनों पक्षों द्वारा परस्पर लगाए जा रहे घटिया आरोपों के चलते मछली बाजार जैसा दृश्य उपस्थित हो गया है. ऐसे माहौल में जब नेता एक दूसरे के कपड़े उतारने में लगे हैं तो जनता के सामने यही संदेश जाता है कि अपने हमाम में सभी नंगे हैं. 

    राजनीति स्तरहीन होकर रसातल में जाती दिखाई दे रही है. अपना अस्तित्व बचाने के लिए दूसरों पर आरोपों की बौछार की जा रही है. ऐसा करने वाले नेता भूल जाते हैं कि किसी की ओर एक उंगली उठाओ तो बाकी उंगलियां अपनी ओर ही रहती हैं. सरेआम पगड़ी ही नहीं, बल्कि जमकर कीचड़ उछाला जा रहा है. इससे दोनों पक्षों की छवि बुरी तरह मलिन हो रही है.

    प्याज की परतों के समान कितने ही स्याह पहलू उभरकर सामने आ रहे हैं. दोनों ही पक्ष एक दूसर का दामन दागदार साबित करने पर तुले हैं. इससे तो यही बात जनता के सामने आ रही है कि कोई भी दूध का धुला नहीं है. आरोप-प्रत्यारोप का अबाध और अटूट सिलसिला चल पड़ा है. सहिष्णुता, शालीनता या गरिमा का कहीं नामोनिशान नजर नहीं आता. शुरुआत हुई मुकेश अंबानी के बंगले एंटीलिया के पास एक गाड़ी में विस्फोटक जिलेटिन छड़ें पाए जाने के मामले से, फिर गाड़ी के मालिक मनसुख की रहस्यमय मौत हुई. 

    वाझे का नाम सामने आया. फिर बताया गया कि वाझे की पुलिस सेवा में बहाली के पीछे नेताओं का हाथ है. वाझे को मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह का मोहरा बताया गया. परमबीर सिंह ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख ने मुंबई के बार और रेस्टोरेंट से 100 करोड़ रुपए वसूली का टारगेट दिया था. देशमुख को मंत्री पद खोना पड़ा. 

    केंद्रीय एजेंसियां सक्रिय हुईं और देशमुख के ठिकानों पर बार-बार छापे पड़े. परमबीर के काठमांडू होते हुए बेल्जियम भाग जाने की बात कही जा रही है. जो राजधानी मुंबई का पुलिस प्रमुख था, वही भगोड़ा माना जा रहा है. इन सभी बात को लेकर केंद्र की बीजेपी सरकार और महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार के बीच खींचतान चल ही रही थी कि तभी राज्य के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के रिश्तेदारों पर आयकर छापे पड़े.

    किरीट सोमैया का आक्रामक अंदाज

    बीजेपी के पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने मानो महाविकास आघाड़ी सरकार को गिराने की सुपारी ले रखी है. वे एनसीपी नेताओं और सीएम उद्धव ठाकरे पर भी आरोपों की तोप दाग रहे हैं. अभी उन्होंने गड़े मुर्दे उखाड़ते हुए कहा कि शरद पवार से पूछा जाए कि 1993-94 में दाऊद के साथ कौन बैठा था? दाऊद का संबंध किससे है, यह महाराष्ट्र की जनता जानती है. इसके पूर्व सोमैया अजीत पवार को निशाने पर ले चुके हैं. उन्हें खुली छूट मिली हुई है.

    नवाब मलिक भी मोर्चा संभाल रहे

    एनसीपी के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक के दामाद के खिलाफ एक्शन लिए जाने के बाद उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों को निशाने पर लिया. एनसीबी जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े ने मुंबई से गोवा जा रहे क्रूज पर छाप मार कर अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन व अन्य को हिरासत में लिया. 

    28 दिन बाद आर्यन की जमानत तो हो गई लेकिन इस दौरान नवाब मलिक ने समीर वानखेड़े के खिलाफ ऐसे सनसनीखेज आरोप लगाए कि अब ड्रग प्रकरण की जांच एनसीबी की बजाय एनआईए करेगी. खुद समीर वानखेड़े से एनसीबी ने पूछताछ की. मलिक ने पिछली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि नीरज गुंडे देवेंद्र सरकार का दलाल था. वह उद्धव और देवेंद्र दोनों का करीबी मित्र रहा है.

    सरकारी कामकाज पर ध्यान नहीं

    जिस तरह पक्ष-विपक्ष एक दूसरे की बखिया उधेड़ने में लगे हैं, उससे वे अपना सम्मान खो रहे हैं. राजनीति में भ्रष्टाचार व अपराध की मिलावट सामने आ रही है. आरोप लगाने और सिद्ध करने में काफी फर्क है लेकिन इस तरह की हरकतों से छवि तो बिगड़ ही जाती है. 

    कमर के नीचे वार करने की ओछी राजनीति से जनता को कोई सार्थक संदेश नहीं मिलता. आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से उलझने के बाद सरकारी कामकाज पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. ऐसी अराजकतापूर्ण, गैर जिम्मेदाराना और घटिया स्तर की राजनीति पहले कभी नहीं देखी गई.