निजीकरण के खिलाफ बढ़ने लगा असंतोष

    केंद्र सरकार निजीकरण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने की पक्षधर है. इस उद्देश्य से वह एयर इंडिया (Air India) को बेचना चाहती है तथा बैंको (Bank) व एलआईसी के निजीकरण का भी मन बना चुकी है. विपक्ष ने सरकारी उपक्रमों के विनिदेश या निजीकरण पर तीखे सवाल उठाए हैं और कहा है कि जनता के पैसों से बने और पिछली सरकारों द्वारा मेहनत से खड़े किए गए सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने या निजीकरण करने का सरकार को कोई हक नहीं है.

    जब कुछ बनाया नहीं तो बेचने का हक किसने दिया है. सरकार की दलील है कि उद्योग या उपक्रम चलाना उसका काम नहीं है. घाटे में चलने वाली इकाइयों से वह छुटकारा पाना चाहती है. सरकर ने इसके लिए रणनीतिक विनिदेश (स्ट्रेटजिक डिसइन्वेस्टमेंट) शब्द का उपयोग किया है. 2014 में सार्वजनिक उपक्रमों की संख्या 236 थी.2016 के बाद से सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई का एकमात्र बड़ा विनिदेश एचपीसीएल (hpcl) द्वारा सरकारी स्वामित्व की ओएनजीसी का किया गया है. विनिदेश के मुद्दे पर असंतोष व्याप्त है. बैंक के बाद जीवन बीमा निगम के कर्मचारियों (Employees) ने भी हड़ताल की. सरकार बहुमत में होने से बेहिचक फैसले  ले रही है जब यह इतने लंबे समय से चल रहे किसान आंदोलन के समने नहीं झुकी तो बैंक कर्मियों व एलआईसी  कर्मियों के सामने कैसे झुकेगी?