डाक्टर हैं कितने काबिल, इंसान को लगाया सुअर का दिल

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, डाक्टरों ने पहली बार इंसान के शरीर में सुअर का दिल लगा दिया. इस पर आपकी क्या राय है? हमने कहा, ‘‘दिल किसी का भी हो, इंसान को उदार या दरियादिल होना चाहिए. हमारी सेना के जवान शेर दिल होते हैं. जिस इंसान में चूहे का दिल होता है वह बुजदिल कहलाता है. बालीवुड के फिल्म निर्माताओं ने हमेशा से दिल को बहुत महत्व दिया है तभी तो उन्होंने दिल देके देखो, दिल दिया दर्द लिया, संगदिल, दिल, दिल एक मंदिर जैसी फिल्में बनाईं. 

    गीतों में भी दिल को शामिल किया गया है. कुछ गीतों के बोल हैं- दिल से मिला के दिल प्यार कीजिए, कोई सुहाना इकरार कीजिए, चलो दिलदार चलो ,चांद के पार चलो, दिल का हाल सुने दिलवाला, मेरे दिल में आज क्या है, तू कहे तो मैं बता दूं. ऐ दिल है मुश्किल जीना यहां, ऐ मेरे दिल कहीं और चल, दिल लगा के हम ये समझे जिंदगी क्या चीज है.’’ 

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज जिनमें दया नहीं होती, ऐसे लोग पत्थर दिल होते हैं तो किसी का दिल फूल सा कोमल रहता है. व्यावहारिक लोग दिमाग से काम लेते हैं और भावुक लोग दिल से. कवि या शायरों की रचना दिल से उपजती है. तब वे लिखते हैं- कभी-कभी मेरे दिल में खयाल आता है कि तुझको बनाया गया है मेरे लिए.’’ हमने कहा, ‘‘किसी डाक्टर से पूछिए तो वह बताएगा कि दिल सिर्फ खून साफ करने की मशीन है. वहां कोई विचार या खयाल नहीं आता. इंसान जो भी अच्छा-बुरा सोचता है, अपने दिमाग से सोचता है. सारी खुराफात की जड़ दिमाग ही है. कुछ लोग तेज दिमाग होते हैं तो कुछ मंद बुद्धि. 

    दिमाग के बल पर शकुंतला देवी और श्रीनिवास रामानुजम जैसे लोग कुछ ही क्षणों में गणित का जटिल से जटिल सवाल हल कर लेते थे. अल्बर्ट आइंस्टीन का दिमाग विलक्षण था जिसे आज तक प्रयोगशाला में सुरक्षित रखा गया है.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, दिमाग चाहे जैसा हो, इंसान को जिंदादिल होना चाहिए. एक शेर है- जिंदगी जिंदादिली का नाम है, मुर्दादिल क्या खाक जिया करते हैं. विदेश में दिल बदला जाता है, हमारे राजनेता दलबदल करने में माहिर होते हैं.’’