CHRIS-JORDAN
File Photo

    नयी दिल्ली. आज क्रिस जॉर्डन (Chris Jordan) अपना 33 वां जन्मदिन (Happy Birthday) मना रहे हैं। बता दें कि आज 33 साल के हुए जार्डन इंग्लैंड की राष्ट्रिय क्रिकेट टीम (England Cricket Team) से खेलते हैं और टी20 फॉर्मेट में उन्होंने अपनी छवि एक शानदार डेथ बॉलर के तौर पर बनाई है, जिसके चलते अब वो नियमित रूप से राष्ट्रीय टीम हिस्सा होते हुए अब तक 52 मैच से ज्यादा खेल चुके हैं। इतना ही नहीं सबसे मुश्किल माने जाने वाले 19वें ओवर को संयम से फेंकने में जार्डन ने महारत हासिल कर रखी है और 2016 के वर्ल्ड कप फाइनल में भी उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ सिर्फ 8 रन देकर मैच और वर्ल्ड कप को इंग्लैंड के झोली के बेहद करीब ला दिया था।

    जन्म और बाल्यकाल

    क्रिस जॉर्डन का जन्म 4 अक्तूबर को 1988, बारबाडोस(वेस्टइंडीज़) में हुआ था। वे एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट खिलाड़ी है जो इंग्लैंड की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए खेलते हैं। हालाँकि क्रिस जॉर्डन का जन्म तो वेस्टइंडीज़ के बारबाडोस शहर में हुआ था लेकिन उन्होंने वेस्टइंडीज के बजाय इंग्लैंड क्रिकेट टीम के लिए खेलना पसन्द किया।

    इन्होंने अपने एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया टीम के खिलाफ 16 सितम्बर 2013 को की थी जबकि टेस्ट क्रिकेट कैरियर की शुरुआत 12 जून 2014 को श्रीलंका क्रिकेट टीम के खिलाफ खेलकर की थी।जॉर्डन मुख्य रूप से दायें हाथ से तेज गति से गेंदबाजी करते हैं। जबकि दायें ही हाथ से बेहतरीन बल्लेबाजी भी करते हैं। लेकिन अब वे मुख्य रूप से गेंदबाज की भूमिका निभाते हैं।

    ब्रायन लारा भी थे उनकी प्रतिभा के कायल

    बारबाडोस में जन्मे जार्डन की शुरुआती प्रतिभा को देखते हुए उनमें महान मैल्कम मार्शल की झलक कई जानकारों ने वैसे तो बहुत देखी। लेकिन असल में खुद जार्डन कोटनी वॉल्श और कर्टले एन्ब्रोस की तरह बनना चाहते थे जिनकी 90 के दशक में जैसे हर टीम के खिलाफ तूती बोलती थी।इतना ही नहीं जार्डन ने ब्रायन लारा को नेट्स पर अपने करियर के शुरुआत में ही अपनी धारदार गेंदबाजी से प्रभावित किया था। उनकी इसी प्रतिभा के चलते प्रतिभा के चलते उन्हें स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप मिली और वो इंग्लैंड आ गए, जहां क्रिकेट ने उन्हें जिंदगी के बड़े अवसरों से उनका बेहतरीन परिचय कराया।

    इंग्लैंड से ही खेलने के पीछे छुपा है दिलचस्प किस्सा 

    इस जादूगर खिलाड़ी और 6 फुट 2 इंच के जॉर्डन के बार में एक दिलचस्प किस्सा भी है, जो ये है कि साल 2007 में लंदन के ओवल मैदान में एक मैच के दौरान दुनिया के सर्वकालीन महान कप्तानों में से एक क्लाइव लॉयड की नजर उन पर पड़ी थी। जब लॉयल को पता चला कि ये युवा वेस्टइंडीज से है तो उन्होंने इंग्लैंड के पूर्व टेस्ट खिलाड़ी माक बूचर से उनका फोन नंबर भी मांगा था। अब बूचर बिल्कुल समझ गए कि शायद लॉयड जार्डन को वेस्टइंडीज के लिए खेलते देखना चाहते थे। 

    बूचर ने ये बात अपने पिता पर टाल दी। कुछ महीने बाद लॉयड खुद बूचर के पिता से मिले और जार्डन के बारे में पूछताछ की तो उन्हें जवाब मिला- महाशय आप लेट हो चुके हैं, वो इंग्लैंड के लिए अंत्तराष्ट्रीय क्रिकेट खेलेगा क्योंकि उसकी मां ब्रिटिश हैं!यही वजह है कि जार्डन, आज आर्चर को अपना छोटा भाई मानते हैं क्योंकि उनकी मां भी ब्रिटिश है और पिता बारबेडियन! इस रिश्ते ने इंग्लैंड के इन दोनों गेंदबाजों की दोस्ती को और भी मजबूत किया है।

    हमेशा चोटों से जूझते हुए की वापसी 

    बहरहाल, जार्डन के जीवन की असली कहानी क्रिकेट के मैदान पर कामयाबी हासिल करने की नहीं बल्कि अलग-अलग चोटों से जूझते हुए और हर बार हसंते हुए वापस मैदान में खुद को खड़ा  करने की रही है। जी हाँ क्रिस जार्डन का करियर इस बात की जैसे एक जीती-जागती मिसाल है कि,  इससे कभी कोई भी फर्क नहीं पड़ता कि लोग आपका कितना भी मजाक उड़ाएं और आपकी जमीनी हकीकत से नवाकिफ हों, लेकिन आपको फिर भी संयम और पुरे साहससे जीवन की रफ्तार पकड़े रहनी है। यहीं तो क्रिस जॉर्डन की बेमिसाल रफ़्तार हमसे कहती है।