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    नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी की एक निचली अदालत ने कथित दिल्ली आबकारी घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार पी शरत चंद्र रेड्डी को शुक्रवार को मानवीय आधार पर 14 दिन की अंतरिम जमानत दे दी। विशेष न्यायाधीश एम. के. नागपाल ने कहा, “…याचिकाकर्ता/ आरोपी पी शरत चंद्र रेड्डी को अपनी मृतक दादी का अंतिम संस्कार करने के लिए 14 दिनों की अवधि के लिए अंतरिम जमानत दी जाती है।”

    अदालत ने रेड्डी को दो लाख रुपये का निजी जमानती बॉण्ड और इतनी ही राशि के मुचलके का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि जमानत की अन्य शर्तों में आरोपी के सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करना, हैदराबाद की सीमा से बाहर न जाना, आपराधिक गतिविधियों में शामिल न होना, जमानत की अवधि न बढ़ाना और अपने मोबाइल फोन तथा उसकी लोकेशन को लगातार चालू रखना शामिल है।

    अदालत ने कहा, “इस आदेश की एक प्रति आरोपी के रिहाई वारंट के साथ उसकी जानकारी, अनुपालन और रिकॉर्ड के लिए संबंधित जेल अधीक्षक को भी भेजी जाए।” इसने संज्ञान लिया कि धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 45 में आरोपी को तब तक जमानत देने पर रोक है जब तक उक्त धारा की शर्तें पूरी नहीं होतीं।

    अदालत ने कहा, “लेकिन यह अच्छी तरह से स्थापित है कि इस तरह की शर्तें तब नहीं लगायी जानी चाहिए, जब किसी आरोपी ने मानवीय आधार पर जमानत मांगी गई हो और ऐसे मामले में प्रतिबंधों और सजा की कठोरता के बावजूद आरोपी को जमानत दी जा सकती है।”

    इस बात का संज्ञान लिया गया कि आरोपी की दादी का 25 जनवरी को निधन हो गया था, लेकिन उसके सबसे बड़े पोते रेड्डी द्वारा अंतिम संस्कार किए जाने की प्रतीक्षा में शव को मुर्दाघर में रख दिया गया था।

    जांच एजेंसी ने छह जनवरी को मामले में पांच व्यक्तियों और सात कंपनियों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर किया था। ईडी के आरोप पत्र में नामित व्यक्तियों में विजय नायर, पी शरत चंद्र रेड्डी, बिनॉय बाबू, अभिषेक बोइनपल्ली और अमित अरोड़ा शामिल हैं। (एजेंसी)