yashomati thakur
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    अमरावती. अपने मंत्री पद के 2 वर्षों का कार्यकाल पूर्ण कर चुकी राज्य की महिला व बाल विकास मंत्री व जिला पालकमंत्री एड. यशोमति ठाकुर ने इन दो वर्षों में किए कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए अपनी और शासन की उपलब्धियां गिनाई हैं. उनके नेतृत्व में महाराष्ट्र ने राष्ट्रीय पोषण महा उपक्रम में राष्ट्रीय स्तर पर पहला नंबर हासिल किया. कुपोषित बालकों की खोज मुहिम चलाकर कितने बच्चों की जान बची. महिला आयोग का कार्यालय राज्य के हर जिले पहली बार स्थापित किया जा रहा है. महाराष्ट्र में अगले महिला दिवस पर महिला नीति की घोषणा करने का संकल्प किया है. 

    कुपोषम मुक्ति के लिए अभियान 

    उनके अनुसार कुपोषण मुक्ति के लिए कुछ मुहिम शुरू की. महिला सुरक्षा का आडिट करवाया. बाल अधिकार को लेकर विशेषज्ञों की सहायता से आमुलाग्र सुधार किए. महिला आयोग के सक्षमीकरण की दिशा में महिलाओं को अपनी शिकायतें दर्ज करने के लिए मुंबई आना पड़ता था, लेकिन अब संपूर्ण राज्य में पहली बार जिला स्तर पर महिला आयोग के कार्यालय शुरू किए जा रहे है. महिला आर्थिक विकास महामंडल के माध्यम से नए कर्ज, बचत गुटों के उत्पादन के लिए मार्केटिंग, अर्थ साक्षर जैसे विभिन्न कार्यक्रम शुरू किए.

    अनाथ बच्चों, त्याग दी गई महिलाओं, वेश्या व्यवसाय करने वाली महिलाओं, भिखारी महिला-बच्चों के लिए राज्य में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर उपक्रम शुरू कराए. कोरोना महामारी के कारण पूरी दुनिया स्तब्ध हो जाने के बीच महिलाओं ने इस महामारी का सामना करने के लिए फ्रंट लाइन वर्कर के तौर काम किया. स्वास्थ्य के क्षेत्र में महिलाओं का सहभाग उल्लेखनीय है. आंगनवाड़ी व आशा सेविकाओं के कारण आज अनगिनत लोगों की जान बच पाई. 

    अगले महिला दिवस पर महिला नीति 

    आंगनवाड़ी सेविकाओं ने हर मुश्किल राह को आसान बनाकर गांव-कस्बों में पोषण आहार पहुंचाया. कोविड -19 से हर कोई घबरा रहा था. लेकिन इस स्थिति में आंगनवाड़ी सेविकाएं गांव-कस्बों में सेवारत थी.  लाकडाउन में पारिवारिक हिंसा की घटनाएँ बढ़ी. बाल विवाह के मामले सामने आए. आलोचनाएं भी हुईं, लेकिन महिला व बाल विकास विभाग ने सभी मामले संवेदनशीलता से निपटाए. मुखबिरों का नया नेटवर्क तैयार किये जाने से बाल विवाह के मामलों का पता चल पाया. मीडिया की भी मदद ली.

    राज्य ही नहीं बल्कि गुजरात में हो रहे बाल विवाह को हम समय रहते रोक पाए. बाल विवाह रोकने के लिए लगातार जनजागृति की जा रही है. कोविड-19 के कारण कई नन्हें बच्चों के सिर से पालकों का साया उठ गया. कोविड के कारण अनाथ हो चुके बच्चों को मदद का हाथ बढ़ाने का निर्णय सबसे पहले महाराष्ट्र ने लिया.

    कोविड के कारण विधवा हुई एकल महिलाओं को राज्य सरकार ने मिशन वात्सल्य के माध्यम से विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाया. वेश्या व्यवसाय में शामिल महिलाओं को आधार कार्ड दिलाया. जिससे सरकारी राशन मिलने और टीकाकरण में आ रही दिक्कतें दूर हो पाईं. राज्यभर में वेश्या व्यवसाय करने वाली महिलाओं से चर्चा कर उन्हें आवश्यक सैनिटरी पैड की आपूर्ति की. 

    जेंडर बजट को स्थान दिलाया

    महिला व बाल विकास विभाग की छोटी सी छोटी योजना व उपक्रमों की सूक्ष्म समीक्षा की. सबसे पहले महिला नीति का अभ्यास किया. महिला नीति पर अमल करने के लिए महाराष्ट्र की विशेष कीर्ति है, लेकिन यह महिला नीतियां क्या केवल कागजों पर ही सीमित होकर रह जाएंगी. इस तरह की स्थिति निर्माण हुई.

    जेंडर बजट के लिए दबाव बनाने से उपमुख्यमंत्री अजीत पवार द्वारा रखे गए वित्त बजट में जेंडर बजट को स्थान मिल पाया. जेंडर बजट के लिए महिला नीति पर कड़ाई से अमल जरूर है. जिससे प्रशासकीय उत्तरदायित्व निश्चित करना जरूरी होने से एक समित का गठन किया. जिसके माध्यम से सुसंगत महिला नीति साकार करने की शुरुआत की. अगले महिला दिवस तक यह नीति तैयार हो जाएगी.  

    अभी बड़ी लड़ाई बाकी है

    सक्षम महिला, सुदृढ बालक, सुपोषित महाराष्ट्र-सुरक्षित महाराष्ट्र यह चतुःसूत्रीय विभाग का घोष  वाक्य अमल में लाया जा रहा है. विभाग से उपर उठकर राज्यभर में लोकतंत्र पर श्रद्धा रखने वाला समाज निर्माण करने, जाति-धर्म में पेंच निर्माण करने वाले तत्वों को रोकने की दिशा में काम करने का बड़ा संतोष है. देश में कोरोना के कारण निर्माण हुई परिस्थिति अभूतपूर्व है. लोकतंत्र का संकोच होने का चित्र सर्वत्र देखने मिल रहा है. इस स्थिति में चुप बैठना अपराध लगता है. जिससे संविधान वाले देश की रक्षा के लिए सजगता से काम करना पड़ेगा. 2 वर्षों का चरण एक छोटा टप्पा है. अभी बड़ी यात्रा व बड़ी लड़ाई बाकी है. जनता-जनार्दन के आशीर्वाद से और भी मंजिलें पाना है. 

    विधायक कार्य करने की ओर अग्रसर 

    देखते-देखते राज्य मंत्रिमंडल में बतौर मंत्री 2 वर्ष पूर्ण हुए है.  पहली बार मंत्री बनने का आनंद व उत्साह कुछ अलग ही था. लेकिन यह पद कांटों का ताज है, इसकी मुझे कल्पना थी. मैं जिस परिस्थिति से राजनीति में आई, वह परिस्थिति मैं कभी नहीं भूली. यही कारण है कि मंत्री बनने के बाद भी मुझमें कोई बदलाव नहीं आया.

    जिस व्रत के लिए मैं राजनीति में आई, उस व्रत को मंत्रिपद से गति मिली. मेरे पिता ने कानमंत्र दिलाय था कि खुद के दुख में दुखी होकर बैठने से अच्छा है अपने कारण अन्यों के दुख दूर हो. इस तरह का काम करों, उस दिन से मैं राजनीति में आई. मंत्री के तौर पर अच्छे से अच्छा विधायक कार्य करने का प्रयास कर रही हूं.