नववर्ष के लिए ताड़ोबा हाऊसफूल, अगले सप्ताह भर में पर्यटकों का नजर आयेगा जमावड़ा

  • कोर के साथ साथ बफर में भी सफारी का लुत्फ उठायेंगे पर्यटक

चंद्रपुर: पट्टेदार बाघों के लिए विश्वप्रसिध्द ताड़ोबा_अंधारी व्याघ्र प्रकल्प के कोर और बफर जोन में अगले सप्ताह भर के लिए ऑनलाईन बुकिंग हाऊसफूल हो चुकी है. अब यदि पर्यटकों को ताड़ोबा में सफारी करनी है तो ऑन स्पॉट पहले पहुंचना होगा. नववर्ष के मौके पर प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक ताड़ोबा पहुंचते है.

अब चूंकि ऑनलाईन बुकिंग की व्यवस्था हो चुकी है तो नववर्ष के आनंद लूटने के लिए महीने भर पूर्व से ही देश और दुनिया भर के पर्यटकों ने बुकिंग कर ली है. ताड़ोबा में स्थित प्राकृतिक छटाओ और मुक्त वातावरण में विचरण करते वन्यप्राणियों का प्रत्यक्ष रूप से दर्शन पर्यटकों केलिए अदभुत अनुभव है. नववर्ष के चार दिन पूर्व से ही इन सभी नजारों को देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ उमड़ने लगती है.

 चंद्रपुर में पर्यटन की दृष्टि से देखा जाए तो फिलहाल ताड़ोबा-अंधारी बाघ परियोजना देश के ही नहीं बल्कि विदेशों के पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित किए हुए है. कोरोना महामारी के चलते ग्रीष्मकाल में पर्यटन काफी प्रभावित रहा. जिस प्रमाण में पर्यटकों के आने की उम्मीद थी उस प्रमाण में कोरोना के चलते पर्यटक यहां नहीं पहुंच पाये. हवाई सेवा पूरी तरह से ठप होने से विदेशी पर्यटकों के लिए यहां पहुंच पाना असंभव ही था. नववर्ष पर भी विदेशी पर्यटकों के पहुंचने की संभावना ना के बराबर है.

नववर्ष का आनंद लूटने के लिए देश के कोने कोने से पर्यटकों ने बुकिंग की हुई है. कोरोना का डर अब सभी क्षेत्रों में लगभग समाप्त सा हो गया है. कोरोना के चलते कई दिनों से घरों में होम कोरटाईन रह चुके लोग अब नये सिरे से जिंदगी का आनंद लेने के लिए आतुर नजर आ रहे है.जिस तरह से ताड़ोबा में ऑनलाईन बुकिंग फूल हो चुकी है उससे पर्यटकों के बाघों के दर्शन के लिए उत्साहित होने का पता चलता है.

सर्वाधिक बाघों के लिए प्रसिध्द इस अभयारण्य में वर्तमान में 100 से अधिक बाघों के होने का अनुमान है. इसके अलावा अभयारण्य से सटे वनक्षेत्र में भी बाघों का अधिवास बन चुका है. यहां बाघ के अलावा तेंदूआ,चीतल, हिरण, सांभर, नीलगाय, जंगली भैसे, भालू, जंगली कुत्ते, बंदर, मोर समेत अन्य वन्यजीवों के अलावा बदलते मौसम में आनेवाले विदेशी पंछी, दुर्लभ प्रजाति के पेड़_पौधे एवं वनस्पति, कोलसा में बड़े घने पेड़ों के अलावा बांस का घना जंगल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है.

1995 में इस अभयारण्य को बाघों के लिए संरक्षित क्षे घोषित किए जाने के बाद यहां बाघों की निरंतर संख्या बढ रही है. ताड़ोबा में मोहर्ली, कोलारा, फुंटवडा, कोलसा गेट से बुकिंग हाऊसफूल हो चुकी है. बफर क्षेत्र में भी बाधों के दर्शन होने से यहां देवाडा, आगरझरी, जूनोना, मदनापुर में भी पर्यटकों ने ऑनलाईन बुकिंग की है.

कोरोना के चलते पर्यटकों की संख्या काफी कम होने से और कोरोना के कड़े नियम लगाये जाने से यहां ना केवल निजी रिसोर्ट मालिकों का बल्कि जिप्सी चालकों, गाईड सेलेकर जंगल में बसे लोगों का रोजगार काफी प्रभावित हो गया था. नववर्ष के आगमन को लेकर जिस तरह से पर्यटकों में उत्साह नजर आ रहा है उससे अब सभी को फिर से अच्छी आय होने की उम्मीद जागी है.