Anganwadi workers indefinite strike for various demands

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  • जिप के समक्ष किया प्रदर्शन

गड़चिरोली. अल्प मानधन में नौनिहाल बच्चों को प्राथमिक पूर्व शिक्षा देने के साथ ही गर्भवति माता व बच्चों के पोषाहार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानेवाले आंगनवाडी सेविकाओं को अल्प मानधन में गुजारा करना पड़ रहा है. जिससे आंगनवाडी कर्मीयों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा, किमान वेतन व पेंशन देने की मांग विगत अनेक दिनों से की जा रही है. लेकिन सरकार की आंगनवाडी कर्मीयों के मांगो की ओर अनदेखी हो रही है. जिससे संतप्त आंगनवाडी कर्मचारियों ने एल्गार करते हुए सड़क पर उतरे है. इस दौरान आज 4 दिसंबर को जिले के आंगनवाडी कर्मी राज्यव्यापी हड़ताल में सम्मिलित होते हुए आज जिला परिषद के समक्ष प्रदर्शन किया. इस दौरान विभिन्न मांगो का ज्ञापन सरकार को ज्ञापन है.       

आंगनवाडी कर्मचारी संगठना सीआईटीयू के बैनर तले जिला परिषद के सैंकडों आंगनवाडी महिलाओं ने धरणा दिया. इस आंदोलन का नेतृत्व प्रा. रमेशचंद्र दहिवडे, अमोल मारकरवार, प्रमोद गोडबाटे, अरूण भेलके, राजेश पिंजरकर आदि ने किया. जिला परिषद के समक्ष हजारों की संख्या में आंगणवाडी सेविकाएं तथा मददनीस इकट्टा हुई थी. इस दौरान उपस्थित नेताओं ने आंगनवाडी सेविकाओं को मार्गदर्शन किया.

विभिन्न मांगो का ज्ञापन जिप के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मार्फत राज्य सरकार को भेजा गया. आंगनवाडी सेविकाओं ने आज सोमवार से बेमियादी हड़ताल शुरू की है. इस आंदोलन में उज्ज्वला उंदिरवाडे, भारती रामटेके, कौशल्य गौरकर, ज्योती बेजकीवार, छाया कागदेलवार, सुशिला कार, सुनंदा बावणे, सुमन तोकलवार, सुनंदा उईके, योगिता मुनघाटे आदि विशेष रूप से उपस्थित रहकर आंदोलन को सफल बनाने प्रयास किया. 

घोषणाओं से दहला परिसर

आंगनवाडी कर्मीयों ने हड़ताल शुरू करते हुए विभिन्न मांगो का ज्ञापन सरकार को भेजा है. इसमें आंगनवाडी महिलाओं को कर्मचारी का दर्जा दे, तबतक किमान वेतन 26 हजार दे, आश्वासन के तहत महिलाओं को मानधन का आधा पेंशन तथा ग्रज्युटी दे आदि मांगो को लेकर घोषणाएं दी गई. आंगनवाडी कर्मचारियों के घोषणाएं व नारों की गुंज से जिप परिसर दहल उठा था. 

आश्वासनों पर नहीं होता अंमल-प्रा. दहिवडे

इस दौरान आंगनवाडी महिलाओं को संबोधित करते हुए सीटू के प्रा. दहिवडे ने कहां कि, जनता द्वारा चुने जानेवाले विधायक, सांसद के भविष्य का विचार कर पेंशन दी जाती है. लेकिन यहीं विधायक जनता के भविष्य का विचार क्यों नहीं करते है. केवल आश्वसन देते है. लेकिन आश्वासनों पर अंमल नहीं होता है. पेंशन तथा ग्रज्युटी देने का आश्वासन विस में दिया गया. इसे 8 माह का कालावधि बितने के बावजूद अबतक अंमल नहीं किया गया. इसपर अंमल होने के लिए इस मांग को लेकर ही बेमियादी हडताल शुरू की गई है. ऐसी बात कहीं. 

सरकार के दबावतंत्र का प्रतिकार करे-मारकवार

इस दौरान पूर्व जिप सदस्य अमोल मारकवार ने कहां कि, कामगारों को संघर्ष के बगैर विकल्प नहीं है. देश में लोकशाही है. लेकिन इस लोकशाही का भांडवलशाही में रूपांतर हुआ है. और गरीब दिन ब दिन गरीब होता जा रहा है. भांडवलदार अमीर हो रहे है. गरीब जनता पर अन्याय, अत्याचार बढ गया है. और इस अन्याय का विरोध करने पर वह दुर करने के बजाएं सरकार द्वारा दबावतंत्र का उपयोग किया जाता है. इस दबावतंत्र का संगठीत होकर प्रतिकार करना चाहिए. ऐसी बात कहीं.