Chief Minister Eknath Shinde

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    मुंबई: मुंबई (Mumbai) में अब 227 वार्डों पर ही चुनाव (Elections) होंगे। शिंदे-फडणवीस सरकार (Shinde-Fadnavis Government) ने महाविकास आघाड़ी सरकार (Mahavikas Aghadi Government) के निर्णय को खारिज करते हुए शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका दिया है। महाविकास आघाड़ी सरकार ने मुंबई में वार्डों की संख्या बढ़ा कर 236 कर दी थी। महानगरपालिका के वार्डों का नए सिरे से परिसीमन कराया गया था, यही नहीं वार्डों के आरक्षण की भी प्रक्रिया पूरी कर ली गयी थी। 

    बुधवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मुंबई सहित राज्य की अन्य महानगरपालिकाओं के सदस्यों की संख्या में सुधार का निर्णय लिया गया। मुंबई महानगरपालिका के वार्ड परिसीमन और वार्डों के आरक्षण को लेकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे थे। कांग्रेस और बीजेपी सहित अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर पुराने परिसीमन के आधार पर ही चुनाव कराए जाने की मांग की थी।

    बीएमसी में होंगे 227 वार्ड 

    मंत्रिमंडल की बैठक में नगर विकास विभाग की तरफ से मुंबई सहित राज्य के अन्य महानगरपालिकाओं की सदस्य संख्या में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे मंजूरी दे दी गयी। मंत्रिमंडल के निर्णय के मुताबिक, मुंबई महानगरपालिका में वर्तमान 236 की बजाय 227 वार्ड ही होंगे। इसी तरह 3 लाख से अधिक और 6 लाख से कम जनसंख्या वाली महानगरपालिका में कम से कम 65 और अधिक से अधिक 85 नगरसेवक होंगे। 3 लाख से अधिक जनसंख्या पर प्रति 15 हजार पर एक अतिरिक्त नगरसेवक की व्यवस्था की जाएगी।

    मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया निर्णय

    मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूर प्रस्ताव के मुताबिक, 6 लाख से 12 लाख जनसंख्या वाली महानगरपालिका में कम से कम 85 और अधिक से अधिक 115 नगरसेवक हो सकते हैं। 12 लाख से अधिक प्रति 40 हजार जनसंख्या एक अतिरिक्त नगरसेवक की व्यवस्था की जाएगी। इसी तरह 24 लाख से अधिक प्रति 50 हजार जनसंख्या पर एक अतिरिक्त नगरसेवक की व्यवस्था की जाएगी। बताया गया कि 24 से 30 लाख  की जनसंख्या वाली मनपा में कम से 151 व अधिक से अधिक 161 नगरसेवक होंगे। इसी तरह 30 लाख से अधिक जनसंख्या वाली मनपा में नगरसेवकों की संख्या 161 से 175 तक रहेगी।

    जिला परिषद में न्यूनतम 50 सदस्य

    ग्राम विकास विभाग की तरफ से भी मंत्रिमंडल की बैठक में जिला परिषद के सदस्यों की संख्या में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया गया। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में महाराष्ट्र जिला परिषद अधिनियम 1961 में सुधार किया गया। जिला परिषद में कम से कम 55 और अधिक से अधिक 85 सदस्य संख्या है। ग्रामीण क्षेत्रों में घट रही जनसंख्या को देखते हुए संख्या में बदलाव का निर्णय लिया गया है। राज्य के सबसे कम जनसंख्या वाले जिले में न्यूनतम 50 सदस्य होंगे। मंत्रिमंडल में लिए गए निर्णय के संदर्भ में जल्द ही अध्यादेश जारी किया जाएगा।