Ambedkar Hospital, Nitin Raut

Loading

नागपुर. कामठी रोड पर डॉ. बाबासाहब आम्बेडकर अस्पताल व अनुसंधान केंद्र के श्रेणीवर्धन और इसे पीजी कॉलेज व अति विशेषोपचार अस्पताल के रूप में विकसित करने के लिए वर्ष 2021 में 1165.65 करोड़ को मंजूरी प्रदान की गई किंतु राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही उत्तर नागपुर के साथ भेदभाव किया गया. गत 13 दिनों से चले आ रहे जन आंदोलन में उत्तर नागपुर की जनता के रोष को देखते हुए अचानक राज्य सरकार द्वारा अस्पताल के लिए 575 करोड़ रुपए की निधि को प्रशासकीय मंजूरी देने का निर्णय लिया गया. राज्य सरकार द्वारा निधि में कटौती किए जाने के कारण शुक्रवार को पूर्व मंत्री राऊत के नेतृत्व में जन आंदोलन स्थल पर सरकार के फैसले के दस्तावेज की होली जलाई गई. निधि कम देने के लिए आंदोलनकारियों ने जनाक्रोश जताया. विधायक विकास ठाकरे ने भी आंदोलन स्थल को भेंट देकर समर्थन दिया.

जमीन अधिग्रहण नहीं तो कहां बनेगा अस्पताल

भाजपा सरकार के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राऊत ने कहा कि 13 अक्टूबर 2021 के सरकार के फैसले के अनुसार निर्माण कार्य के लिए 876.28 करोड़ रुपए की निधि मंजूर की गई थी. यहां तक कि इस प्रकल्प का निर्माण नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण द्वारा करने को भी मंजूरी दी गई. अनावर्ति खर्च के लिए पहले 3 वर्ष में 876.28 करोड़ रुपए की राशि तय की गई थी. अब सरकार की ओर से इस प्रकल्प में सर्वसुविधायुक्त अस्पताल निर्मित करने के लिए जमीन के हस्तांतरण का कहीं भी उल्लेख नहीं है. आर्किटेक्ट संदीप शिर्के द्वारा प्रस्तुत प्लान के अनुसार निधि पर्याप्त नहीं है. प्रकल्प पर 2021 में ही 1165.65 करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित किया गया था. अब 2 वर्ष बाद सरकार ने निधि कम कर दी. यदि जमीन का अधिग्रहण ही नहीं है तो अस्पताल कहां बनेगा? इसे लेकर सरकार के फैसले पर निशाना भी साधा.

आम्बेडकरी जनता से भद्दा मजाक

उन्होंने कहा कि 13 अक्टूबर 2020 को प्रकल्प को लेकर समीक्षा बैठक ली गई थी जिसमें भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद के मानकों के अनुसार स्थायी निर्माण सहित बिजली, पानी और अन्य के लिए 876.28 करोड़ की लागत का अनुमान लगाया गया था. 13 अक्टूबर 2021 के सरकारी आदेश में भी इसका विवरण दिया गया किंतु अब सरकार ने आम्बेडकरी जनता के साथ भद्दा मजाक किया गया है. एक तरह से केवल 575 करोड़ रुपए को प्रशासकीय मंजूरी दिए जाने का उल्लेख कर उत्तर नागपुर की जनता के साथ धोखा किया है.

उन्होंने कहा कि महंगाई को देखते हुए सरकार ने निधि बढ़ाकर देना चाहिए था. उलटे निधि कम कर दी. भीम पैंथर के राजाभाऊ नगराले, राजा करवाड़े, दिनेश अंडरसहारे, सुरेश पाटिल, छाया खोबरागडे, मनोज बंसोड, मुरलीधर मेश्राम, जगदीश गजभिए, अचल ढोक, संदीप सांगोडे, उद्धव खडसे, शेखर चौधरी, अंकित राऊत, शुद्धोधन पाटिल, अतुल रामटेके, विशाल मेश्राम, नीरंजन उके, विनोद पटोले, अशोक सिंह चौहान, अरुण केदार आदि शामिल थे.