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  • 41 में से 39 फाइल्स सामान्य प्रशासन विभाग से ई-गवर्नेन्स में दर्ज

नागपुर. मनपा में हुए स्टेशनरी घोटाले में उस समय बड़ा धमाका देखने को मिला जब जिला सत्र न्यायालय में चल रही सुनवाई के दौरान आर्थिक अपराध अन्वेषण विभाग (ईओडब्ल्यू) की ओर से मोहन पडवंशी को जमानत नहीं देने की मांग कर कई तरह के खुलासे किए गए. मामले की जांच कर रहे अधिकारी के अनुसार पडवंशी सामान्य प्रशासन विभाग में क्लर्क के रूप में कार्यरत था. स्टेशनरी घोटाले में बिल देने के लिए तैयार फर्जी 41 फाइलों में से 39 फाइलें इसी अभियुक्त ने सामान्य प्रशासन विभाग से ई-गवर्नेन्स प्रणाली द्वारा दर्ज का थीं. सामान्य प्रशासन विभाग के सहायक आयुक्त की मंजूरी लेकर ही वित्त विभाग को बिल मंजूरी के लिए फाइल भेजी गई. जांच अधिकारी का मानना है कि वरिष्ठ अधिकारी के साथ साठगांठ कर ई-गवर्नेन्स में फर्जी जानकारी दर्ज कर वित्त विभाग को भेजे जाने की संभावना है. 

अन्य विभागों की बची है जांच

जांच अधिकारी के अनुसार मोहन पडवंशी अपने लॉगिन आईडी से ठेकेदार की फाइलों को मंजूर करता था. स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य कौनसे विभागों की फाइलों को ई-गवर्नेन्स में दर्ज कर मंजूरी दी गई इसकी अब तक जांच बची हुई है. यदि आरोपी को जमानत दी गई तो घोटाले से संबंधित सभी सबूत नष्ट होने की प्रबल संभावना भी उन्होंने जताई. जांच अधिकारी के अनुसार अभी भी 6 फाइलों का पता नहीं लग पाया है. घोटाले से संबंधित सभी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए मनपा को पत्र भेजा गया है. कुछ जानकारी तो दी गई किंतु कुछ अभी तक प्राप्त नहीं हुई है. 

IT विभाग ने अब तक नहीं दी जानकारी 

जांच अधिकारी के अनुसार पडवंशी के लॉगिन आईडी के डिटेल्स मनपा के सूचना एवं तकनीकी विभाग के पास है. हालांकि यह जानकारी उपलब्ध कराने का पत्र मनपा को दिया गया है किंतु आईटी विभाग से इस संदर्भ में अब तक जानकारी नहीं दी गई है. आरोपी को जमानत मिलने पर उसके फरार होने की संभावना भी जताई गई. गुरुवार को जिला सत्र न्यायालय के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के समक्ष पुलिस ने उक्त जानकारी रखी. इसके बाद अदालत ने शुक्रवार को मामले पर सुनवाई रखी है. 

सेवानिवृत्त न्यायाधीश से मांगी जा रही स्वीकृति

गुरुवार को एक ओर जहां जिला सत्र न्यायालय में घोटाले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है, वहीं दूसरी ओर मनपा मुख्यालय में जांच समिति की बैठक में  सेवानिवृत्त न्यायाधीश से समिति में शामिल होने पर स्वीकृति मांगे जाने की जानकारी उजागर की गई. ऑडिट विभाग से तथा एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को समिति में नियुक्ति करने का अधिकार प्रदान किया गया है जिसके अनुसार समिति सदस्य अधि. संजय बालपांडे को इन दोनों के नाम निश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई. अधि. बालपांडे ने इसके लिए 2 दिन का समय मांगा है.