Jagdish Mullick first worry about his failure

  • एनसीपी नगरसेवकों ने भाजपा शहराध्यक्ष को बनाया निशाना

पुणे.  भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शहर अध्यक्ष जगदीश मुलिक (City President Jagdish Mullick) ने महापालिका में कभी प्रतिनिधित्व नहीं किया है.  इसलिए महापालिका के घटनाक्रम के बारे में उन्हें कोई पता नहीं है. महापालिका में सीमावर्ती गांवों (villages) के अधिग्रहण के संबंध में चर्चाएं वर्ष 2012-13 में शुरू हुईं. उस समय इन गांवों को मनपा  के अधीन लिया जाना चाहिए या नहीं, यह प्रस्ताव महासभा में किया गया था. उस समय गांवों को मनपा में लिया जाना चाहिए, इस भूमिका को भारतीय जनता पार्टी (BJP)ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ स्वीकार किया था.

भारतीय जनता पार्टी और एनसीपी एक साथ आए और इस पर मतदान किया और प्रस्ताव पारित किया था और राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था. ऐसा होने के बावजूद भी भाजपा और मुलिक अब विरोध कर रहे है. यह बात ठीक नहीं है. मुलिक पहले अपने असफलता की चिंता करें. ऐसी टिप्पणी एनसीपी के नगरसेवक बाबूराव चांदेरे, दत्ता धनकवड़े और सुभाष जगताप ने की है. 

अपने कालावधि ने क्यों गांवों को समाविष्ट नहीं किया 

इन नगरसेवकों ने कहा कि  2014 के विधानसभा चुनावों में, भारतीय जनता पार्टी ने पुणे शहर से शानदार जीत हासिल की थी. जगदीश मुलिक को वडगाव शेरी से खुद का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला. उस अवसर पर 34 गांव महापालिका में शामिल करने का निर्णय लिया गया. 31 गांवों में भारतीय जनता पार्टी (‍BJP) और शिवसेना (Shiv sena) के विधायक थे. वर्ष 2014 में महाराष्ट्र में आपकी पार्टी सत्ता में थी. आपने उस कार्यकाल के दौरान महापालिका  में इन 34 गांवों को शामिल क्यों नहीं किया? सरकार गांव शामिल करने को लेकर उदासीन है. यह महसूस करने के बाद हवेली तालुका में संबंधित गांव के नागरिक एक साथ आए और एक समिति का गठन किया और कोर्ट में याचिका दायर की. कोर्ट ने फैसला देते हुए राज्य सरकार से राय मांगी. उन्होंने अपनी राय दी कि हम इन 34 गांवों को पुणे नगर निगम में चरणों में ले जाएंगे. आदेश के अनुसार, 2017 में 11 गांवों को मनपा में शामिल किया गया था. जब जगदीश मुलिक अपनी पार्टी के मनपा में सत्ता में थे, तो उन्होंने जानबूझकर 11 गांवों की उपेक्षा की. इसलिए यह कहना सही नहीं है कि हम आज अपने 23 गांवों के पीछे खड़े हैं. 

आपका अधूरा काम पूरा कर रहे है 

एनसीपी नगरसेवकों ने कहा कि  महापौर मुरलीधर मोहोल का कहना है कि हम इन गांवों को लेने के खिलाफ नहीं हैं.  इसके लिए राज्य सरकार ने 9 हजार  करोड़ उपलब्ध कराया जाना चाहिए. हम  महापौर को याद दिलाते हैं कि 2017 में, 11 गांवों को मनपा  में समावेश के बाद, जब आप राज्य में सत्ता में थे, तो क्या आपने कभी 11 गांवों के लिए धन की मांग की थी?  इन 11 गांवों में से आप विकास में असफल रहे हैं इसलिए आपको अपनी असफलताओं को ढंकने के लिए दूसरों की निंदा नहीं करनी चाहिए.  चुनावों की दौड़ में इन गांवों को मनपा  में लेने का हमारा कोई इरादा नहीं है. अदालत के आदेश के अनुसार गांव लिए है.  यह इसलिए हो रहा है क्योंकि हमारी अपनी सरकार ने 23 गांवों को कवर करने की गारंटी दी है. इसलिए हम आपके अधूरे काम पुरे कर रहे हैं.