नागालैंड: जिसे कहा जाता है ‘लैंड ऑफ फेस्टिवल’, जानें कैसा हुआ राज्य का निर्माण

    नई दिल्ली: नागालैंड राज्य का आज 59 वां स्थापना दिन है। राज्य की स्थापना (Nagaland Formation Day) आज ही के दिन 1 दिसंबर 1963 को हुई थी। जिसके बाद यह भारत का 16वां राज्य बना। नागालैंड भारत की उत्तर-पूर्व सीमा पर स्थित हैं। नागालैंड को ‘लैंड ऑफ फेस्टिवल’ के नाम से भी जाना जाता हैं, वहीं इसे ‘पूरब का स्विट्जरलैंड’ भी कहा जाता है। नागालैंड पर्यटकों द्वारा भारत में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले हिल स्टेशनो में से एक हैं।

    नागालैंड भारत का उत्तर पूर्वी राज्य है जिसकी राजधानी कोहिमा है। पहाड़ियो से घिरे इस राज्‍य के पूर्व में म्यांमार, पश्चिम में असम, उत्तर में अरुणाचल प्रदेश और दक्षिण में मणिपुर है। राज्य में आदिवासी संस्कृति अहम है जिसमें स्थानीय त्योहार और लोक गायन काफी महत्वपूर्ण है। 2012 की जनगणना के मुताबिक यहां की आबादी 22.8 लाख है। राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो है और राज्यपाल जगदीश मुखी है।  

    बता दें कि नागालैंड का कोई प्रारंभिक या लिखित इतिहास नही है। वहीं पडोसी राज्य असम के अहोम साम्राज्य में नागा समुदाय, उनकी अर्थव्यवस्था और रीती-रिवाजो का उल्लेख किया गया है। 

    नागालैंड को मिला राज्य का दर्जा 

    1816 में जब म्यांमार के बर्मन ने असम पर आक्रमण किया तो इसके परिणामस्वरूप 1819 में दमनकारी बर्मन शासन की नीव रखी गई। ब्रिटिश शासन की स्थापना होने के पहले यांनी 1826 तक यह शासन चला। भारत को 1947 में आजादी मिली। उसके बाद भी नागा समुदाय के लोग असम के छोटे से भाग में बसे हुए थे। दूसरी तरफ मजबूत राष्ट्रिय अभियान के माध्यम से नागा समुदाय के राजनितिक संघ की भी मांग की गई। जिसके चलते वहां बहुत सी हिंसक घटनाए घटी और 1955 में भारतीय सेना को व्यवस्था पुनर्स्थापित करने का आदेश भी दिया गया। 

    1957 में नागा नेता और भारत सरकार के बीच सहमति बनी। असम के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले नागा और एंसंग फ्रंटियर डिवीज़न के नागाओ को सरकारने ने एक जगह लाया। दूसरी तरफ सहमति के बाउजूद भारत सरकार से असहकार, कर ना देना, तोड़-फोड़ और सेना पर आक्रमण करने जैसी हरकते होने लगी। लोगों द्वारा 1960 में में हुए सम्मलेन में इस बात को पेश किया गया कि नागालैंड को भारतीय संघ का हिस्सा होना चाहिए। जिसके बाद 1963 में नागालैंड को राज्य का दर्जा दिया गया और 1964 में लोकतांत्रिक ढंग से यहाँ एक कार्यालय की स्थापना की गई। वहीं 1 दिसम्बर 1963 में कोहिमा को राज्य की राजधानी घोषित किया गया। 

    दर्जा मिलने के बाद भी जारी रही विद्रोही गतिविधियाँ

    राज्य का दर्जा मिलने के बाद भी नागालैंड में विद्रोही गतिविधियाँ जारी रही और साथ ही क्षेत्र में डाकुओ की संख्या भी बढती गई। जिसके बाद समझ बुझाकर कुछ समय तक विद्रोह को रोका गया और मार्च 1975 में राज्य पर प्रत्यक्ष राष्ट्रपति शासन लागु किया गया। वहीं 1975 सबसे बड़े विद्रोह समूहों के नेताओं ने अपने हथियार डालने और भारतीय संविधान को स्वीकार करने पर सहमति व्यक्त की। और 1980 में शक्तिशाली समर्थक अलगाववादी चरमपंथी समूह ‘नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड’ की स्थापना की गई ।