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    नई दिल्लीः सरकार गंगा नदी के किनारे स्थित शहरों से निकलने वाले गंदे जल को शोधित करके विद्युत संयंत्रों को बेचेगी और इसके लिये अगले एक-दो सप्ताह में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और विद्युत मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन (MOU) किया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के महानिदेशक जी. अशोक कुमार ने कहा है कि, ‘हम गंदे जल को शोधित करके उसका पुन: उपयोग करने की एक योजना पर काम कर रहे हैं। इसके लिये अभी मथुरा स्थित इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ सहमति बनी है और अगले महीने एमओयू पर हस्ताक्षर किया जायेगा।

    उन्होंने कहा कि, हमने नदी के 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित विद्युत संयंत्रों को शोधित जल बेचने के लिये बातचीत की है। शोधित जल की बिक्री के लिये विद्युत मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है और मंत्रालय ने इसे विचारार्थ केंद्रीय विद्युत प्राधिकार (सीईए) को भेजा है।

    एनएमसीजी के महानिदेशक ने आगे बताया, ‘‘अगले एक दो हफ्ते में एमओयू की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के बाद हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।” उन्होंने कहा कि इसके लिये 30 बिजली परियोजनाओं एवं संयंत्रों को चिन्हित किया गया था और इसके बाद एनएमसीजी एवं केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की टीम ने एक महीने तक इन संयंत्रों का दौरा किया। कुमार ने कहा कि इन चिन्हित संयंत्रों में से कुछ काफी पुराने थे और कुछ में तकनीकी समस्याएं सामने आईं।

    उन्होंने कहा, ‘‘जांच परख करने के बाद 11 संयंत्रों को छांटा गया है जिन्हें शोधित जल की आपूर्ति की जायेगी। ” योजना के राजस्व मॉडल के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अभी शुरूआत की गई है और आने वाले समय में अन्य पहलुओं पर विचार किया जायेगा। उन्होंने बताया, ‘‘बातचीत के दौरान संयंत्रों एवं उद्योगों ने शोधित जल की सुनिश्चित आपूर्ति पर जोर दिया है, ऐसे में हमें जलमल शोधन संयंत्र (STP) की क्षमता बढ़ानी है और इस दिशा में हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं।

    अधिकारी कुमार ने बताया कि, वर्ष 2014 से दिसंबर 2021 तक 7 वर्ष में एसटीपी के माध्यम से 900 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) गंदे जल को शोधित करने की क्षमता तैयार की गई थी। वहीं, पिछले 6-8 महीने में 800-900 एमएलडी क्षमता तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि, सात वर्ष में जलमल शोधन की जितनी क्षमता तैयार की गई, उतनी पिछले छह से आठ महीने में तैयार की गई है।

    कुमार ने कहा कि, ‘‘ अगले छह महीने में हम 1000 एमएलडी क्षमता विकसित करना चाहते हैं। इस प्रकार से हमें उम्मीद है कि इस साल हम जलमल शोधन की 2000 एमएलडी की नयी क्षमता जोड़ सकेंगे। इस प्रकार से साल के अंत तक 3000 एमएलडी क्षमता सृजित की जा सकेगी और तभी संयंत्रों को सुनिश्चित जल की आपूर्ति हो सकेगी।

    एनएमसीजी महानिदेशक ने बताया कि मिशन ने नदी में गाद प्रबंधन, उनके पुन: चक्रण एवं उपयोग के लिये ‘‘रूचि पत्र” (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) आमंत्रित किया है। कुमार ने बताया, ‘‘हमने विशेषज्ञों एवं संस्थानों से गाद प्रबंधन एवं गाद के उपयोग को लेकर सुझाव मांगा है और काफी लोगों ने इसके लिये आवेदन किया है।” उन्होंने कहा कि इस बारे में हम 15 जुलाई तक आवेदन का इंतजार करेंगे और इसके बाद चयन किया जायेगा ।(एजेंसी)