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    सीमा कुमारी

    नई दिल्ली: हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को ‘मासिक शिवरात्रि’ (Masik Shivratri ) का पावन व्रत रखा जाता है। महाशिवरात्रि की तरह यह व्रत भी पुण्यदायी एवं मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना जाता है। हर माह में यह व्रत पड़ने के कारण यह मासिक शिवरात्रि कहलाता है। इस दिन भोलेनाथ की पूजा सच्चे एवं निश्छल मन से करने से भक्तों के जीवन में कभी भी परेशानियां नहीं आती। साथ ही उनकी कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। तो आइए जानें ज्येष्ठ माह की शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि के बारे में

    शुभ मुहूर्त,

    आषाढ़, कृष्ण चतुर्दशी

    सोमवार, 27 जून 2022

    शिवरात्रि प्रारंभ: 27 जून 2022 पूर्वाह्न 03:25 बजे

    शिवरात्रि समाप्त: 28 जून 2022 सुबह 05:52 बजे

    पूजा-विधि

    मासिक शिवरात्रि के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि करें। इसके बाद विधि विधान से पूजन करें। इस दिन यदि मंदिर नहीं जा सकते तो घर पर रहकर ही पूजन करें। सबसे पहले शिव जी के समक्ष पूजा स्थान में दीप प्रज्वलित करें। यदि  घर शिवलिंग है तो दूध, और गंगा जल आदि से अभिषेक करें। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा आदि अवश्य अर्पित करें। इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा भी करनी चाहिए। पूजा करते समय नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करते रहें। भगवान शिव को भोग लगाएं और आरती करें।

    महिमा

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवरात्रि शिव शंकर को बेहद प्रिय है। इस दिन विधि-विधान के साथ पूजन व व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं। शिवरात्रि पर व्रत और पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सकारात्मकता का संचार होता है। समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए शिवरात्रि के दिन शिवलिंग का रुद्राभिषेक करना बहुत शुभ फलदायी माना जाता है।