नैतिकता का लोप, राम मंदिर ट्रस्ट का घोटाला चिंताजनक

    ऐसे लोगों को चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए जो भगवान के नाम पर भी घोटाला करते हैं. प्रभु हर व्यक्ति के कर्म देखते हैं. उनसे कुछ छुपा नहीं रहता. आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट पर बड़ा गंभीर आरोप लगाया है. उनका कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपयों की धोखाधड़ी की गई है. वहां 5 करोड़ 80 लाख रुपए की कुसुम पाठक और हरीश पाठक की जमीन सुल्तान अंसारी और रविमोहन तिवारी ने केवल 2 करोड़ रुपए में खरीदी.

    इस जमीन खरीदी के गवाह अयोध्या के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय और मंदिर ट्रस्ट के एक सदस्य अनिल मिश्र बने. इसके बाद उस जमीन को चम्पत राय ने तुरंत राम मंदिर ट्रस्ट के नाम पर 18.50 करोड़ रुपए में सुल्तान अंसारी और रविमोहन तिवारी से खरीद लिया. इसके बाद अनिल मिश्र और और ऋषिकेश उपाध्याय फिर से खरीदी के गवाह बनाए गए. सांसद संजय सिंह का आरोप है कि यह सीधे-सीधे अवैध धनशोधन या मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है. जिसमें ब्लैक मनी को व्हाइट कर लिया गया. इस डील में नियम-कानून को ताक पर रखकर घोटालेबाजी हुई. इस मामले में कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा- हे राम, ये कैसे दिन देखने पड़ रहे हैं, आपके नाम पर चंदा लेकर घोटाला! पूर्व केंद्रीय मंत्री व टीएमसी उपाध्यक्ष यशवंत सिन्हा ने कटाक्ष किया कि राम को भी नहीं छोड़ा, अब क्या बचा? मोदी है तो मुमकिन है! यह भी कहा गया कि राम मंदिर ट्रस्ट घोटाले की वजह से हिंदुओं की श्रद्धा को ठेस पहुंची है.

    आरएसएस प्रमुख को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए. दूसरी ओर राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने कहा कि गलत आरोप लगाने वालों पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए. महंत राजू दास ने कहा कि घोटाले का आरोप गलत निकला तो संजय सिंह पर 50 करोड़ रु. की मानहानि का दावा ठोकेंगे. इस प्रकरण की जांच कर वस्तुस्थिति सामने लाई जानी चाहिए. मंदिर के चंदे का सारा लेन-देन बाकायदा चेक और रसीदों के साथ होना चाहिए, जिसका सही लेखा-जोखा हो.