CM ठाकरे की पत्नी पर टिप्पणी, BJP आईटी सेल प्रमुख की ओछी हरकत

    जिम्मेदारी पूर्ण पद पर किसी नादान व्यक्ति की नियुक्ति करना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने के समान है. बीजेपी ने अपने सोशल मीडिया सेल का महाराष्ट्र प्रमुख जितेन गजारिया को बनाया. ऐसे व्यक्ति को अपने दायित्वों का अहसास होना चाहिए लेकिन गजारिया ने शिवसेना पर प्रहार करते समय शालीनता और मर्यादा पूरी तरह ताक पर रख दी. बिना सोचे-समझे उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे पर विवादित टिप्पणी कर दी. गजारिया ने 4 जनवरी को रश्मि ठाकरे की तस्वीर ट्वीट की थी और साथ में लिखा था – ‘मराठी राबड़ी देवी.’

    सीएम उद्धव का स्वास्थ्य ठीक न होने के चलते मुख्यमंत्री की कुर्सी रश्मि ठाकरे को सौंपे जाने की चर्चा चल रही थी. किसी भी राजनीतिक टीका-टिप्पणी का एक स्तर होना चाहिए और उसमें किसी के परिजनों को घसीटना कदापि उचित नहीं है. खास तौर पर महिलाओं का सम्मान बनाए रखने को लेकर पूरी तरह सजग रहना चाहिए. गजारिया ने बिना सोचे-समझे अपने ट्वीट में रश्मि ठाकरे की तुलना बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से की.

    इस बेतुकी बात का कहीं कोई संदर्भ नहीं था. बिहार में जब चारा घोटाले में लालूप्रसाद यादव को जेल जाना पड़ा था तो उन्होंने अपनी जगह अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनवा दिया था. महाराष्ट्र में ऐसी कोई स्थिति नहीं है. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अपनी रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं.

    इस तरह का कोई संकेत नहीं है कि वे पद त्याग कर अपनी पत्नी को सीएम बनाना चाहेंगे. वैसे रश्मि ठाकरे सुशिक्षित हैं और मातोश्री में सुगृहिणी के रूप में वे सारे दायित्व भली भांति संभालती हैं. उनको लेकर इस तरह का दिल दुखाने वाला ट्वीट बीजेपी आईटी सेल प्रमुख को नहीं करना चाहिए था.

    शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने इस ट्वीट का विरोध किया और कहा कि बीजेपी को विश्वविद्यालय शुरू करना चाहिए कि कैसे ट्वीट किया जाता है. यह विकृत मानसिकता दर्शाता है. एनसीपी नेता विद्या चव्हाण ने विरोध जताते हुए अमृता फडणवीस को भी इसमें घसीटा. इस तरह की टिप्पणी कदापि शोभनीय नहीं है. राजनीति का स्तर इतना भी नहीं गिरना चाहिए. साइबर पुलिस ने गजारिया से 5 घंटे पूछताछ की और बाद में माफी का हलफनामा देने के बाद छोड़ दिया.