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File Photo : PTI

  • गोसी प्रकल्प के साथ अन्य स्थलों को दी भेंट

भंडारा. ऐतिहासिक पवनी शहर के साथ इंदिरा सागर प्रकल्प अर्थात गोसी खुर्द प्रकल्प पर ठंड में ही पर्यटकों की भीढ़ बढ़ते का दिखायी दे रहे हैं. क्रिसमस की छुट्टियों का आनंद लेने कई लोग गोसीखुर्द के वैनगंगा नदी का विशाल जलाशय आंखों में सामने के लिए भीड़ कर रहे हैं. दिन ब दिन पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होते का दिखाई दे रहा है, किंतु पर्यटकों के लिए कोई भी सुविधा नहीं है. जिससे कई लोगों को परेशानी हो रही है.

विदर्भ के सबसे बड़े इंदिरा सागर गोसीखुर्द प्रकल्प, रूयाल सिंदपुरी के पत्रा मेत्त संघ के अंतरराष्ट्रीय महासमाधिभूमि महास्तुप, पवनी के ऐतिहासिक विदर्भ के अष्टविनायकों में से एक पंचमुखी गणेश मंदिर, उमरेड करांडला, पवनी वन्यजीव अभयारण्य व पर्यटन स्थल का समावेश है. जिसके कारण भरी ठंड में पर्यटकों के कदम पवनी तहसील की ओर आकर्षित होते दिखायी दे रहा है.

पर्यटन स्थलों पर देखी जा रही भीड़

पवनी से 12 किमी दूरी पर महत्वकांक्षी गोसीखुर्द प्रकल्प है. प्रकल्प का सौंदर्य अधिक ही बढ़ गया है. प्रकल्प के घाटउमरी के बाजू में की हरियाली से घिरी पहाड़ी, प्रकल्प का नीला पानी देख पर्यटकों को खूब भा रहा है. प्रकल्प के 33 वक्रद्वार से प्रकल्प को भव्य बनाया है. प्रकल्प हमेशा चर्चा में रहने के कारण भंडारा जिला विश्व के नक्शे पर आया है. पवनी एतिहासिक एवं प्राचीन शहर है. प्राचीन कार्यकाल में पवनी वैभवशाली शहर के रूप में प्रसिद्ध था. सौर्य, वाकाटक, श्रृंप सातवाहन यादव कार्यकाल में शहर प्रगत था. इस शहर पर यादवगोंड भोसले राजा ने राज्य किया.

यादव के बाद चंद्रपुर के गोंड राजा ने पवनी के पहाड़ी पर 15वें शतक में किला बंधवाया. शहर के 3 बाजू के पहाड़ी पर 3 मैल किला बंधवाया. इसके बाद 160वें शतक में भोसले का राज्य आया. शहर में अष्टविनायक में से एक पंचमुखी गणेश मंदिर जागृत देवस्थान है. मंदिर की प्रतिमा 10वें शतक के होने का माना जाता है. नवनिर्मित उमरेड करांडला पवनी वन्यजीव अभयारण्य का वन घना व पक्षी मुक्तहस्त भ्रमण करते है. इस कारण अभयारण्य में पर्यटकों की भीड़ हो रही है. 

जगह-जगह जल रहे अलाव

आसमान से बादल छंटने की वजह से भीषण ठंड बढ़ गई है. जिले के तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई है. जिसके कारण ठंड में कंपकंपी वाली रात बितानी पड़ रही है. ठंड के सीडन में गर्म कपड़े भी प्रभावित नहीं कर रहे हैं. नतीजतन बुजुर्गों के साथ छोटे बच्चों को भी अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है. इसके कारण शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी हर जगह अलाव जलते नजर आते हैं. गंभीर ठंड का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. ठंड के कारण होने वाले रोग बढ़ रहे हैं. कड़ाके की ठंड ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है.