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  • पालकों का सवाल, सरकार नहीं कर रही योग्य नियोजन

नागपुर. जिस वक्त नागपुर सहित विदर्भ में कोरोना के मरीजों की संख्या कम थी, उस वक्त मुंबई में संक्रमित तेजी से बढ़ रहे थे. सरकार ने मुंबई को छोड़कर बाकी जिलों की स्थिति की समीक्षा किये बिना ही स्कूल-कॉलेज बंद करने का निर्णय ले लिया. उस वक्त भी सरकार के फैसले का कई संगठनों ने विरोध किया था. अब जब मुंबई में संक्रमित कम हो गये तो सरकार ने 24 जनवरी से स्कूल खोलने का निर्णय लिया है. जबकि फिलहाल नागपुर जिले में संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है. इस हालत में 24 जनवरी तो दूर की बात, इस महीनेभर स्कूल खुलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं. 

सरकार ने बढ़ते कोरोना के प्रकोप के बाद 4 जनवरी से स्कूल और कॉलेजों को बंद कर दिया. यह बंदी 15 फरवरी तक लगाई गई थी. इस दिन जिले में कुल संक्रमित 196 मिले थे. जबकि अगले ही दिन संख्या बढ़कर 404 हो गई थी. इसके साथ धीरे-धीरे संक्रमितों की संख्या बढ़ने लगी. तब तक मुंबई में स्थिति भयंकर हो गई थी. वहां 20,000 से अधिक संक्रमित एक दिन में मिल रहे थे.

पहले भी किया था विरोध

विदर्भ में स्कूल बंद करने को लेकर विविध संगठनों ने विरोध किया था. संगठनों का कहना था कि ग्रामीण भागों में संक्रमितों की संख्या कम है. वहीं कॉलेजों में आने वाले छात्रों के दोनों डोज हो गये है. इस हालत में कॉलेज बंद करने का कोई औचित्य नहीं है. जबकि स्कूल भी बंद करने की जैसी स्थिति नहीं बनी थी. इस संबंध में कुछ संगठनों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री को भी पत्र भेजा था. पालकों का कहना है कि अब सरकार ने एक बार फिर स्कूल खोलने की घोषणा की है. यह घोषणा ऐसे वक्त की जा रही है, जब नागपुर सहित विदर्भ में संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. गुरुवार को नागपुर जिले में 4,428 संक्रमित मिले. जबकि मुंबई में स्थिति काबू में आ गई है. वहां गुरुवार को करीब 5,000 संक्रमित मिले हैं. वहीं जानकारों द्वारा अगले कुछ दिनों में विदर्भ में संक्रमितों का आंकड़ा तेजी से बढ़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है. इस हालत में 24 जनवरी से तो दूर की बात है, इस माह के अंत तक स्कूल खुलने की संभावना नजर नहीं आ रही है.

छात्रों के नुकसान पर सरकार नहीं गंभीर

पालकों का कहना है कि कोरोना को लेकर राज्यभर में अलग-अलग परिस्थिति है लेकिन सरकार द्वारा निर्णय लेते वक्त इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता. स्कूल बंद करने से छात्रों का नुकसान हो रहा है. कॉलेज बंद करने जैसी स्थिति नहीं होने के बाद बंद करा दिये गये. हालांकि सरकार ने स्थानीय प्रशासन को परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार दिया है लेकिन 10वीं व 12वीं बोर्ड की परीक्षा राज्यभर के लिए एक ही ली जाती है. इससे विदर्भ के छात्रों का नुकसान होना तय है.