मच्छिंद्र शिर्के का तहसील कार्यालय के सामने परिवार आंदोलन

    मालेगांव : छावनी पुलिस स्टेशन (Police Station) के कर्मचारियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करके उपविभागीय दंडाधिकारी (Sub Divisional Magistrate) की फौजदारी प्रक्रिया संहिता का आदेश घर पर चिपका दिया। इस आदेश के तहत 15 मई तक तहसील (Tehsil) के धार्मिक स्थलों (Religious Places) से 200 मीटर की दूरी पर रहने, शोर मचाने (Making Noise), वाद्य यंत्र (Musical Instruments) बजाने पर प्रतिबंध लगा दिया है, ऐसे में सरकारी आदेश का पालन करने के लिए मुझे मेरे परिवार के साथ रहने और व्यवसाय के लिए मेरे गाय – बछड़ों के चारा – पानी की व्यवस्था करने के लिए उपविभागीय दंडाधिकारी के सरकारी बंगले में और कार्यालय में 15 मई तक पर्यंत उपलब्ध करवाएं, इस मांग के लिए विश्व हिंदू परिषद के मच्छिंद्र शिर्के (Machhindra Shirke) ने अपने परिजनों के साथ अपर जिलाधिकारी कार्यालय (District Magistrate Office) के सामने धरने (Picketing) पर बैठे हैं। शिर्के का कहना है कि छावनी पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों ने गैरकानूनी तरीके से आदेश की जो प्रति चस्पा की है, वह बिल्कुल अनुचित है। 

    उपविभागीय अधिकारी के आदेश का विरोध   

    महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने 4 मई को मस्जिद के गैरकानूनी लाउडस्पीकर के विरोध में आंदोलन किया था। उपविभागीय दंडाधिकारी की ओर से यह आदेश मनसे पदाधिकारियों को देना स्वाभाविक है, लेकिन मनसे और आंदोलन से मेरा कोई संबंध नहीं है, ऐसा दावा करते हुए जो आदेश चस्पा किया है, वह न्यायोचित नहीं है। शिर्के का कहना है कि अपर पुलिस अधीक्षक से चर्चा का दौर जारी रहते समय केवल मालेगांव में कांग्रेस, राष्ट्रवादी, एम. आई. एम. जैसे राजनीतिक दबाव में उपविभागीय दंडाधिकारी ने उक्त आदेश निकालने का आरोप भी शिर्के ने लगाया है। 

    शिर्के ने बताया कि मेरे घर और व्यवसाय के लिए गाय गोठा नवदुर्गा माता और विठ्ठल रुक्मिणी मंदिर, नवदुर्गा नगर, कलेक्टर कार्यालय धार्मिक स्थल से कुछ ही दूरी पर स्थित है। शिर्के ने बताया कि परिवार के साथ घर पर रहते समय गाय या, गाय का चारा पानी करते हुए दिवस रात इन धार्मिक स्थलों से ज्यादा से ज्यादा 20 मिनट की दूरी कर रहना आवश्यक है, इसलिए मेरे रहने और जीविका की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। उपविभागीय दंडाधिकारी मालेगांव जो आदेश निकाला है, वह आदेश हंसी का पात्र बन रहा है। गैरकानूनी आदेश के लिए सीधे तौर पर उपविभागीय दंडाधिकारी ही जिम्मेदार हैं।