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सांकेतिक तस्वीर

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  • 10 महीनों में 83 बदमाश गिरफ्तार, 67 पिस्तौलें जब्त

पुणे: जिस पुणे में न्याय के अधिकार के लिए लाठी-डंडों का सहारा लिया जाता था, आज वहां सरेआम बदमाशों द्वारा बंदूक और पिस्तौल का उपयोग किया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में शहर में फायरिंग की घटनाएं हुई हैं। लेकिन शहर की कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले बदमाशों की कमर तोड़ने का काम पुलिस ने किया है। पिछले 10 महीनों में 83 लोगों को गिरफ्तार किया है और 67 पिस्तौलें जब्त की गई हैं। वहीं पिछले दस सालों में पुलिस ने करीब 1500 पिस्तौल धारकों को गिरफ्तार कर 1100 से ज्यादा पिस्टल पकड़े हैं। आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल की तुलना में पिस्तौल की संख्या में बढ़ोतरी कम हुई है। 

पुणे एक तेजी से बढ़ता हुआ शहर है। सांस्कृतिक शहर और शिक्षा के केंद्र के रूप में जाना जाने वाला यह शहर अब अपराध के लिए पहचाना जाने लगा है। जो अपराध कभी मुंबई में फलता-फूलता था, वही अपराध अब पुणे में देखने को मिल रहा है। मुंबई में अपराध पर नकेल कसना पुलिस के लिए मुश्किल था। पुलिस ने एनकाउंटर का रास्ता चुनकर अपराध पर कुछ हद तक काबू पाया। लेकिन, हकीकत तो यह है कि मुंबई के अपराधी देश के शीर्ष अपराधी बन गए हैं। पुणे शहर का तेजी से विकास हुआ है और रोजगार, शिक्षा तथा उद्योग की उपलब्ध सुविधाओं के साथ-साथ मजदूरों की संख्या के कारण देश विदेश सहित देश भर से नागरिक यहां आए हैं। परिणामस्वरूप अपराधीकरण भी बढ़ा है। कभी-कभार झड़प तो आम बात है, लेकिन धारदार हथियार और पिस्तौल भी अब आम हो गए हैं। 

पिछले कुछ महीनों में देखा गया है कि तमंचे और पिस्टल का इस्तेमाल कर अपराध किए जा रहे हैं। इसके मद्देनजर पुलिस कमिश्नर रितेश कुमार ने पिस्तौल का उपयोग करने वालों ढूंढने के निर्देश दिए थे। अपराध शाखा के उपायुक्त अमोल ज़ेंडे और स्थानीय पुलिस ने अपना ध्यान पिस्तौल धारकों और उनके सप्लायरों पर केंद्रित किया। उन्हें सप्लायरों के साथ ट्रैक किया गया. साथ ही चेन को ध्वस्त करने के प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि पुणे में पिस्तौलों की आवक कम हो गई है। पहले देखा गया था कि पिस्तौल धारकों में अधिकतर युवा होते थे। उनमें एक क्रेज पैदा हो गया है। देखा गया है कि कई लोग डर के मारे पिस्तौल भी लेकर चल रहे हैं। 

पिस्तौल मिलना आसान
दूसरे राज्यों में पिस्तौल सस्ते मिलते हैं। इसे दो से तीन गुना ज्यादा कीमत में राज्य में बेचा जाता है। अब अपराधों के क्षेत्र में हाल ही में प्रवेश करने वाले और किशोरों में पिस्तौल रखने का क्रेज बढ़ गया है। उत्तमनगर में एक दुकान लूटने वाले नाबालिगों के गिरोह को पकड़ने के बाद पता चला कि उन्होंने मध्यप्रदेश से पिस्तौल लाया था। लेकिन पिस्तौल लाते समय उनके द्वारा गलती से तीन राउंड फायरिंग हुई। यह गोलियां फिर से लाने के लिए पैसों की जरूरत थी। इसलिए उन्होंने फिर से लूटपाट की। उत्तमनगर में दुकान लूटने के बाद वह फिर से पिस्टल और गोलियां लाने वाले थे। 

वर्ष-         पिस्तौल    आरोपी

2011           78        106

2012            76        102

2013            92        139

2014           120       166

2015           110       151

2016           124       163

वर्ष-   दर्ज मामले- जब्त पिस्तौल – गिरफ्तार आरोपी

2017                 92            111           121

2018                 97           136          122

2019                 70            90             96

2020                 84            116           02

2021                  84            75            88

2022                  54            82            93

OCT 2023        59             67           83