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पुणे: पुणे डिवीजन के सीनियर डिविजनल सिक्योरिटी कमिश्नर (Senior DSC) उदयसिंह पवार का तबादला कर दिया गया है। सीनियर डीएससी का यह तबादला, पिछले दिनों पुणे रेलवे स्टेशन से नजदीक स्थित रेलवे क्वाटर्स (Railway Quarters) में नाबालिग लड़की के साथ हुए दुष्कर्म मामले (Rape Case) में कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। इस मामले में यह तीसरी कार्रवाई मानी जा रही है। इससे पहले दुष्कर्म के इस मामले के उजागर होने और प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुणे स्टेशन के आरपीएफ इंस्पेक्टर बी एस रघुवंशी और स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच के इंस्पेक्टर सबीर शेख को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर जांच के आदेश रेलवे प्रशासन ने दिए थे। 
 
लमडिंग डिवीजन में तबादला मतलब पनिशमेंट पोस्टिंग
दुष्कर्म मामले की जांच पुणे डिवीजन के असिस्टेंट सिक्योरिटी कमिश्नर को दी गई थी। जिसकी रिपोर्ट उन्हे एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करनी थी। जांच रिपोर्ट में कौन कौन सी बातें सामने आई हैं, इसका पता तो नहीं चल सका लेकिन रेलवे के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि सीनियर डीएससी का तबादला असम में एनएफआर (नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे) जोन के लमडिंग डिवीजन में कर दिया गया है। रेलवे विभाग में लमडिंग डिवीजन में तबादले को पनिशमेंट पोस्टिंग माना जाता है। एक अधिकारी ने बताया कि चूंकि लमडिंग डिवीजन रेलवे में कम विकसित डिवीजन माना जाता है और वह इलाका भी उग्रवाद प्रभावित इलाका है, इसलिए वहां अफसरों के पास काम भी अधिक नहीं होता और जिसके पास काम कम उसकी वैल्यू भी कम हो ही जाती है। 
 
 
पुलिस से एक कदम आगे आरोपी 
फिलहाल इस दुष्कर्म मामले की जांच जीआरपी कर रही है, लेकिन मामले के मुख्य आरोपी आरपीएफ के हेड कांस्टेबल को गिरफ्तार करने में अभी तक नाकाम रही है। संबंधित मामले में जीआरपी ने अभी तक कुल तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। जीआरपी ने मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए कम से कम चार टीमें बनाई हैं। लेकिन आरोपी पुलिस से एक कदम आगे ही चल रहा है। 
 
नाबालिगों को रेस्क्यू करने के लिए रखे गए थे निजी कर्मचारी 
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों में से करण राठौड़ (30) और सुष्मिता कसबे (24) को कथित तौर पर नाबालिग लड़की को हिरासत में रखने के मामले में गिरफ्तार किया गया है।  जानकारी के मुताबिक मुख्य आरोपी अनिल पवार सिद्धार्थ मल्टीपरपज सोसायटी नाम का NGO चलता था। जिसके माध्यम से घर से भागी लड़कियों को रेस्क्यू करने के नाम पर उनके रिश्तेदारों से उगाही करता था। फिलहाल NGO फरार आरोपी अनिल पवार की पत्नी के नाम पर पंजीकृत है। जांच में पता चला है कि पवार ने घर से भागी लड़कियों का पता लगाने के लिए कई लोगों को नियुक्त किया था, जिन्हे वह 5 से 6 हजार रुपये नकद वेतन के तौर पर देता था।