Eknath Shinde

ठाणे. राज्य में बड़ी तेजी के साथ आबादी बढ़ रही है। इस स्थिति में शहरी क्षेत्रों का नियोजित तरीके से विकास करना मुश्किल हो रहा है। इस तरह की मुश्किलों को देखते हुए विकास प्रारुप के कार्यान्वयन को और अचुक और सटीक बनाने के लिए आगे से विकास प्रारुप जीआईएस प्रणाली (GIS System) पर आधारित किया जाएगा। उक्त प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने कहा कि नगरविकास विभाग ने इसके लिए पात्र विशेषज्ञ संस्था की चयन सूची (Selection List) (ए पैनल) को अंतिम प्रारुप देकर सार्वजनिक किया है।

उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से हर चरण में विकास प्रारुप की जानकारी अत्याधुनिक तरीके से मिल सकेगी। इस तरह के प्रस्ताव को मंजूरी देने वाला देश में महाराष्ट्र (Maharashtra) पहला राज्य बन गया है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र प्रादेशिक नियोजन और नगर रचना अधिनियम 1966 के तहत नगर पंचायत, नगर परिषद अथवा किसी भी तरह के नियोजन स्वराज्य संस्था की स्थापना के 3 साल के भीतर उनके क्षेत्र के विकास योजना का प्रारुप तैयार कर मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजना अनिवार्य होता है।

 रियल टाइम जानकारी रखना संभव हो सकेगा

अभी तक डीपी पुराने तरीके वाला नक्शे पर आधारित होता है। ऐसी स्थिति में इसके कार्यान्वयन और समीक्षा लेते समय कई मर्यादाओं का भी ध्यान रखना पड़ता है। इससे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं को देखते हुए तत्कालीन राज्य सरकार ने अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लेकर जीआईएस (जियोग्राफिकल इफॉर्मेशन सिस्टम) प्रणाली आधारित डीपी तैयार करने का निर्णय साल 2019 में लिया था। वहीं, राज्य में महाविकास आघाड़ी सरकार आने के बाद योजना को और गति दी गई। बुधवार को इस योजना को नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने मंजूरी दे दी। उन्होंने कहा कि जीआईएस प्रणाली आधारित विकास प्रारूप के क्रियान्वयन में रियल टाइम जानकारी रखना संभव हो सकेगा। इस तरह के डीपी के चलते जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर के लेयर्स प्रणाली को सहजता से तैयार किया जा सकेगा। 

अतिरिक्त खर्च को नियंत्रित करने में भी आसानी होगी

साथ ही सरकार और स्थानीय स्वराज्य संस्था स्तर पर आसानी से समीक्षा लिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भूखंड के विकास, परियोजना, नागरी, जलापूर्ति, मलनि:स्सारण, सड़क जैसी सभी बुनियादी सुविधाओं के प्रबंधन का प्रारुप आसानी से तैयार किया जा सकेगा। साथ ही तकनीक के इस्तेमाल से इस तरह के काम को दो सालों में पूरा कर लिया जाएगा। इससे अतिरिक्त खर्च को नियंत्रित करने में भी आसानी होगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल योजना को शुरु कर दिया गया है। जीआईएस आधारित प्रणाली के माध्यम से बीते तीन-चार सालों के दौरान अस्तित्व में आए नगरपरिषद, नगरपंचायत आदि में शामिल कुल 96 शहरों के विकास योजनाओं को तैयार किया जाएगा।