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थाईलैंड पीएम श्रेथा थाविसिनी ( Photo: X/@Thavisin )

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बैंकॉक: थाईलैंड के प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिनी (Thailand PM Srettha Thavisin) ने हिंदू धर्म (Hinduism) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उथल-पुथल से जूझ रही दुनिया को अहिंसा, सत्य, सहिष्णुता और सद्भाव के हिंदू मूल्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए तभी विश्व में शांति की स्थापना हो सकेगी। 

विश्व हिंदू कांग्रेस की मेजबानी करना सम्मान की बात

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, थाईलैंड पीएम श्रेथा थाविसिनी  ने कहा, “हिंदू धर्म के सिद्धांतों और मूल्यों पर आयोजित विश्व हिंदू कांग्रेस की मेजबानी करना हमारे देश के लिए सम्मान की बात है। विश्व में हिन्दुओं की एक प्रगतिशील और प्रतिभा संपन्न समाज के रूप में पहचान स्थापित करने के उद्देश्य से ही इस भव्य सम्मेलन का शुभारंभ हुआ है।”

हिंदुओं से की ये अपील 

थाइलैंड की राजधानी में तीसरी विश्व हिंदू कांग्रेस (डब्ल्यूएचसी) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भागवत ने दुनियाभर के हिंदुओं से अपील की कि वे एक दूसरे से जुड़ें और मिलकर दुनिया से कड़ी जोड़ें। उन्होंने दुनियाभर से आए विचारकों, कार्यकर्ताओं, नेताओं और उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हमें हर हिंदू तक पहुंचना होगा, संपर्क साधना होगा। सभी हिंदू मिलकर दुनिया में सभी से संपर्क साधेंगे। हिंदू अधिक से अधिक संख्या में जुड़ रहे हैं और दुनिया के साथ जुड़ने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।”

दुनिया हिंदुत्व की ओर देख रही

 भागवत ने कहा कि दुनिया, खासतौर पर कोविड महामारी के बाद यह मान चुकी है और आम-सहमति से यह बात सोच रही है कि भारत प्रसन्नता और संतोष का मार्ग दिखाएगा। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय भौतिकवाद, साम्यवाद और पूंजीवाद के साथ प्रयोग करते हुए लड़खड़ा रही है और प्रसन्नता की तलाश में वह हिंदुत्व की ओर देख रही है।

आज का विश्व लड़खड़ा रहा 

संघ प्रमुख ने कहा, ‘‘आज का विश्व लड़खड़ा रहा है। 2,000 साल से उन्होंने खुशी, आनंद और शांति लाने के लिए अनेक प्रयोग किए हैं। उन्होंने भौतिकवाद, साम्यवाद और पूंजीवाद के प्रयोग किए हैं। उन्होंने अनेक धर्मों से जुड़े प्रयोग किए हैं। उन्हें भौतिक समृद्धि मिल गई है, लेकिन संतोष नहीं है।”

भागवत ने कहा, ‘‘सभी को दुनिया के लिए कुछ योगदान देना होगा। हमने अपनी विशेषता पहचान ली है। हमारे अंदर सभी के प्रति सम्मान है। हमारे पूर्वजों ने इसे पहचाना था लेकिन हम इस कौशल को भूल गए और टुकड़ों में बांट दिए गए और अधीन हो गए। अब हमें एक साथ आना होगा।” उन्होंने कहा कि आक्रोश, घृणा, घृणा भरे भाषण, द्वेष और अहंकार लोगों को साथ में आने से रोकते हैं और समाज या संगठन को तोड़ देते हैं। 

विश्व हिंदू कांग्रेस का उद्घाटन

वर्ल्ड हिंदू फाउंडेशन के संस्थापक और वैश्विक अध्यक्ष स्वामी विज्ञानानंद ने शंख बजाकर सम्मेलन की शुरुआत की। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहनराव भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, विश्व हिंदू परिषद के महासचिव मिलिंद परांडे मौजूद थे। 

61 देशों के 2200 से अधिक प्रतिनिधि शामिल

जानकारी के लिए बता दें कि विश्व हिन्दू कांग्रेस कार्यक्रम में 61 देशों के 2200 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए है। इन प्रतिनिधियों ने शिक्षा, अर्थव्यवस्था, अनुसंधान और विकास, मीडिया और राजनीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। इनमें करीब 25 देशों के सांसद और मंत्री भी शामिल हैं।