DIGVIJAY-EVM
दिग्विजय सिंह ने EVM पर उठाया सवाल

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नई दिल्ली/भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव (MP Asembly Election 2023) में कांग्रेस (Congress) पार्टी को जहां बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा है। वहीं सूबे में BJP ने बंपर जीत दर्ज करते हुए 163 सीटें अपने नाम कर ली हैं। इधर कांग्रेस, राज्य की 230 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 66 पर ही सिमट  कर रह गई। BJP की इस जबरदस्त जीत के बाद कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। 

दिग्विजय का EVM पर सवाल 

दरअसल चुनावी नतीजे आने के दो दिन बाद आज यानी 5 दिसंबर की सुबह-सुबह दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने ट्वीट कर एक बार फिर EVM पर अपना चितपरिचित सवाल उठाते हुए कहा, “ऐसी कोई भी मशीन जिसमें चिप लगी हो वो हैक की ही जा सकती है। मैं तो साल 2003 से ही EVM से मतदान कराए जाने के खिलाफ रहा हूं।” 

इतना ही नहीं दिग्विजय सिंह ने इस सवाल को एक ऐसा बुनियादी सवाल बताया है, जिसपर सभी राजनीतिक दलों का विचार-विमर्श हो। इसी के साथ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भारतीय निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट से भी सवाल करते हुए कहा कि क्या वो भारत के लोकतंत्र को बचा सकते हैं? 

EVM-पोस्टल बैलेट के वोटिंग पैटर्न पर सवाल 

इसके पहले बीते सोमवार को भी दिग्जिवजय सिंह ने सोमवार को ट्वीट्स की एक सीरीज में पोस्टल बैलेट के द्वारा मिले मतदानों की जानकारी साझा की थी। दरअसल पोस्टल बैलेट के जरिए पड़ने वाले मतों में ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस पार्टी को BJP से ज्यादा वोट मिले हैं। इसपर दिग्विजय सिंह सवाल करते हुए कहा कि अगर प्रदेश की जनता वही है तो EVM और पोस्टल बैलेट के वोटिंग पैटर्न में इतना अंतर कैसे हो सकता है। इस पर विचार होना चाहिए।

वहीँ पूर्व CM सिंह ने पोस्टल बैलेट के नतीजों की जानकारी देते हुए कहा, पोस्टल बैलेट के जरिए हमें यानी कांग्रेस को 199 सीटों पर बढ़त है, जबकि इनमें से अधिकांश सीटों पर EVM काउंटिंग में हमें मतदाताओं का फिर पूर्ण विश्वास न मिल सका। पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा कि, “यह भी कहा जा सकता है कि जब तंत्र जीतता है तो जनता (यानी लोक) हार जाती है।”जानकारी दें कि प्रदेश में BJP ने 230 में से 163 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि कांग्रेस को महज 66 सीटें मिली हैं।

क्या EVM हो सकती है हैक ? 

गौरतलब है की चुनाव आयोग के मुताबिक, EVM मशीन कंप्यूटर से कंट्रोल नहीं होती हैं। ये स्टैंड अलोन मशीन होती हैं जो इंटरनेट या किसी दूसरे नेटवर्क से कनेक्ट नहीं होती हैं। इसलिए ये हैकिंग से पूरी तरह सुरक्षित हैं।

हालांकि आठ साल पहले, अमरीका की मिशिगन यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिकों ने एक डिवाइस को मशीन से जोड़कर दिखाया था कि मोबाइल से संदेश भेजकर मशीन के नतीजों को बदला जा सकता है। जिसे भारत की आधिकारिक संस्थाओं ने इस दावे को ख़ारिज करते हुए कहा था कि मशीन से छेड़छाड़ करना तो दूर, ऐसा करने के लिए मशीन हासिल करना ही मुश्किल होगा।

देखा जाए तो लाखों वोटिंग मशीनों को हैक करने के लिए काफ़ी ज़्यादा धन की ज़रूरत होगी और ऐसा करने के लिए इस काम में मशीन निर्माता और चुनाव कराने वाली संस्था का शामिल होना ज़रूरी है। जो कि शायद मुश्किल साबित होगा।