nashik miraculous-snow-on-shankar-pindi-shivling-in-nashik-trimbakeshwar-temple
File Photo

    • जिले में लगा शिव का नारा
    • कोरोना महामारी के बाद शिवभक्तों में बड़ा उत्साह

    अकोला. चल कांवड़ियां, चल कांवड़ियां, चल कांवड़ उठा, कांवड़ उठा नारा शिव का लगा मन चाहा फल देगा बाबा…… इस गीत की पंक्तियों की तरह सावन माह के पहले सोमवार को कांवड़धारियों में बड़ा उत्साह दिखाई दिया. शिवभक्तों ने कांवड़ उठाकर नारा शिव का लगाकर गांधीग्राम से जल लेकर भगवान राजराजेश्वर को जलाभिषेक किया.

    अकोला में मराठी सावन माह के चौथे सोमवार को शहर से बड़ी कांवड़ व पालकी महोत्सव यात्रा निकलती है. लेकिन कोरोना महामारी के चलते पिछले दो सालों से सार्वजनिक कांवड़ व पालकी महोत्सव यात्रा बंद थी. अभी कोरोना की सभी पाबंदी हटने से इस वर्ष कांवड़धारियों ने मराठी सावन माह के पहले ही सोमवार को शहर से कांवड़ व पालकी यात्रा निकाली है. रविवार की देर रात शहर से 18 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गांधीग्राम में स्थित पूर्णा नदी से जल लेकर कांवड़धारी पैदल यात्रा कर शहर में स्थित भगवान राज राजेश्वर मंदिर में स्थित शिवलिंग पर सोमवार को जलाभिषेक करते है. जिससे उनको मन चाहा फल मिलता है. 

    शिवालयों पर भक्तों की भीड़

    1 अगस्त को शहर के शिवभक्त मंडलों ने कांवड़ व पालकी द्वारा जल लाकर राज राजेश्वर को जलाभिषेक किया. सड़क पर गुलाल उड़ाते, डीजे बजाते व नाचते हुए शिवभक्तों अकोलावासियों का ध्यानाकर्षण किया. शहर में स्थित सभी शिवालय, राज राजेश्वर मंदिर में दर्शन व जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों की बड़ी भीड़ जमी थी. सावन माह का सोमवार निमित्त मंदिर में विशेष सजावट व साज सृंगार किया गया था. सोमवार को दिनभर दर्शन के लिए शिवभक्तों की भीड़ दिखाई दी.  

    कांवड़धारियों में बड़ा उत्साह 

    इस कांवड़ व पालकी महोत्सव में बड़ी कांवड़ व आकर्षक पालकी के लिए शिवभक्त मंडलों में बड़ा उत्साह दिखाई देता है. इस वर्ष कांवड़धारियों में तपे हनुमान मंदिर, लाडिस फैल व खदान आदि परिसर की कांवड़ व पालकी शिवभक्त मंडलों ने सावन माह के पहले ही सोमवार को कांवड़ व पालकी यात्रा निकाली थी. कांवड़ व पालकी महोत्सव के लिए हरिहरपेठ मंडल, अनाभाऊ साठे नगर, अनंत नगर, वाल्मिकी नगर, राजेश्वर पालकी, खोलेश्वर, जागेश्वर, बाभलेश्वर मित्र मंडल, जय महाकाल आदि मंडल उत्सव की तैयारी में लगे है. इन कांवड़धारियों में दो गगरी से 500 से अधिक गगरी दिखाई देते है. कांवड़ व पालकी के साथ विविध झांकी आकर्षण का केंद्र ठहरती है. 

    चतुर्थी निमित्त गणेशरुप 

    सावन सोमवार को राज राजेश्वर मंदिर में स्थित शिवलिंग की आकर्षक सजावट की जाती है. रात में शिवलिंग का साज श्रृंगार देखने के लिए शिवभक्तों की भीड़ रहती है. सावन माह के पहले सोमवार को चतुर्थी होने के शिवलिंग को गणेशरुप का आकर्षक सजावट किया गया था.