Antilia Case : Sachin Waze moves application to shift from Thane hospital to Mumbai hospital
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    मुंबई. मनसुख हिरेन (Mansukh Hiren) की संदिग्ध मौत के मामले में सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वझे (Sachin Vaze) पर गिरफ्तारी (Arrest) की तलवार लटक रही है। ठाणे (Thane) सत्र न्यायालय ने अंतरिम जमानत (Interim Bail) से इंकार किया है। मनसुख हिरेन  की पत्नी ने सचिन वझे पर पति की हत्या करने का आरोप लगाया है। जिसको लेकर विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने यह मुद्दा जोर शोर से उठाया था। विपक्ष के दबाव में वझे का तबादला दूसरे विभाग में कर दिया गया है। मामले की जांच एटीएस कर रही है।

     मनसुख हिरेन की हत्या के आरोप में गिरफ्तारी से बचने के लिए सचिन वझे ने ठाणे सत्र न्यायालय में यचिका दायर कर दी थी।अदालत ने फौरी तौर पर अंतरिम जमानत देने से इंकार किया है। इस मामले की सुनवाई अब 19 मार्च को होगी। रिलायंस उद्योग समूह के मालिक मुकेश अंबानी के घर के बाहर स्फोटक से भरी स्कार्पियो के मालिक होने का दावा कारने वाले मनसुख हिरेन की लाश मुंब्रा रेती बंदर रोड स्थित खाड़ी में मिली थी। इस मामले की जांच एटीएस कर रही है, जबकि स्फोटक रखने वाले मामले की जांच एनआईए को सौंपी गयी है।दोनों एजेंसियां जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में जुटी हुई हैं।

    एटीएस ने भी वझे से लंबी पूछताछ की 

    मनसुख हिरेन की मौत मामले में विपक्ष के निशाने पर आए पुलिस अधिकारी सचिन वझे का बयान एनआईए ने दर्ज किया है। साथ ही एटीएस ने भी वझे से लंबी पूछताछ की है। वझे का तबादला पहले पुलिस के गुप्त वार्ता विभाग से सीएफसी विभाग में किया गया अब उन्हें नगरी सुविधा केंद्र में भेजा गया है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि एटीएस उन्हें मनसुख की मौत के मामले में कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।

    अलविदा कहने का समय आ गया है, वझे के वॉट्सएप स्टेटस से हडकंप

    विवादों में घिरे पुलिस अधिकारी सचिन वझे का एक वॉट्सएप स्टेटस सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।  इसमें लिखा है। ‘अब दुनिया से अलविदा कहने का समय आ गया है’ हालांकि, उनके नंबर पर अब यह स्टेटस नजर नहीं आ रहा है।  कहा जा रहा है कि अधिकारियों के समझाने पर उन्होंने इसे हटा लिया है। वायरल स्टेटस में वझे ने लिखा कि 3 मार्च 2004 को सीआईडी में मेरे सहयोगियों ने मुझे झूठे आरोप में गिरफ्तार किया था। वह मामला अभी भी क्लियर नहीं हुआ है, लेकिन अब इतिहास खुद को दोहरा रहा है। मेरे सहकर्मी अब मेरे लिए फिर से एक जाल बिछा रहे हैं। तब और अब की स्थिति में थोड़ा अंतर है। उस समय मेरे पास 17 साल का धैर्य, आशा, जीवन और सेवा थी, लेकिन अब मेरे पास न तो 17 साल का जीवन है और न ही सेवा। बचने की कोई उम्मीद नहीं है। यह दुनिया को अलविदा कहने का समय है।