Gujarat government has so far recovered 249 crores for violation of corona rules and not applying masks, fined many people
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तारिक खान

मुंबई. यूं तो कोरोना (Corona) जैसी जानलेवा महामारी (Epidemic) को दूर रखने के लिए मास्क (Masks) पहनना हर हाल में जरूरी है, पर इसी मास्क ने पुलिस (police) की मुसीबत बढ़ा दी है क्योंकि यही मास्क अपराधियों (criminals) को चेहरा छुपाने के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गया है. अब असामाजिक तत्व आसानी से अपराध को अंजाम देते हैं और बेरोकटोक निकल जाते हैं क्योंकि वे मास्क की वजह से पहचान में नहीं आते हैं. 

सीसीटीवी (CCTV) में भी उनका चेहरा पकड़ में नहीं आ रहा है जिससे पुलिस वालों को अब उनकी धर पकड़ के लिए ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है. यूं तो लुटेरे, झपटमार, चोर और बदमाश पहले भी मुंह ढककर वारदात को अंजाम देते रहे हैं, लेकिन खुले आम मुंह ढक कर नहीं चल पाते थे, अब मास्क की अनिवार्यता के बाद वह पुलिस की नाक के सामने से आराम से निकल जाते हैं. 

कैसे बनेगा स्केच, कैसे होगी मजिस्ट्रेट के सामने पहचान

कई मौकों पर ऐसा भी होता है जब बड़ी वारदातों और गंभीर अपराधों को अंजाम देने वाले फरार मुजरिमों की शिनाख़्त के लिए पुलिस विक्टिम के सामने किसी स्केच आर्टिस्ट को बिठाती है. तब आर्टिस्ट आरोपी के चेहरे, नाक, मुंह, आँख, कान, बाल, होठ और सर आदि के बारे में पूछ कर उस फरार आरोपी का स्केच बनाता है और जांच अधिकारी उसी स्केच की मदद से केस की इन्वेस्टिगेशन कर के आरोपी को गिरफ्तार करता है, लेकिन क्या कोरोना काल में यह संभव है क्या ? पुलिस के मुताबिक कई बार विक्टिम या वारदात स्थल पर खड़ा कोई चश्मदीद गवाह आरोपी को पहचान लेता था, तो पकड़े गए आरोपी को जेल में उसकी शिनाख़्त परेड कराई जाती है, जिसमें मजिस्ट्रेट के सामने उस आरोपी जैसे हुलिए और चेहरे वाले 7 आरोपी को विक्टिम या चश्मदीद गवाह के सामने खड़ा किया जाता है और आरोपी की शिनाख़्त होने की वजह से उसे सजा भी मिलती है. लेकिन अब जब आरोपी मास्क में होगा तो, गवाह कैसे मजिस्ट्रेट के सामने उसकी शिनाख़्त करेगा?

क्राइम प्रिवेंशन और डिटेक्शन पर प्रतिकूल असर

मुंबई शहर में अपराध पर नियंत्रण पाने और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन मास्क की वजह से इन दोनों ही मकसद पर बहुत प्रतिकूल असर पड़ेगा. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, इस तरह (मास्क) की दिक्कत को देखते हुए पुलिस को पुराने दिन वाली मोडस-ऑपरेंडी जिसमे खबरियों के नेटवर्क पर ज्यादा काम करना पड़ेगा और आरोपी के मोबाइल फ़ोन से जुड़े टेक्निकल एविडेंस पर मेहनत करनी पड़ेगी तभी आरोपियों को वारदात के तुरंत बाद ही पकड़ा जा सकता है. जांच अधिकारियों और पुलिस कर्मियों की सबसे बड़ी समस्या है अपराधियों से जुर्म कबूल कराना,ज्यादातर आरोपी झूठ बोलते है और आसानी से जुर्म नहीं कबूलते है.जिसकी वजह से पुलिस को उन्हें थप्पड़ भी मारना पड़ता है,लेकिन कोरोना काल में पुलिस आरोपी को थप्पड़ मरना तो दूर छूने से भी डरेगी कि कहीं आरोपी कोरोना पॉजिटिव हुआ तो वो भी कोरोना संक्रमित न हो जाए. गौरतलब है कि कोरोना काल में बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी करोना संक्रमित हुए थे.

बदमाशों की ढाल

कोविड-19 के संबंध में राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर प्रत्येक व्यक्ति के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है. धीरे-धीरे लॉकडाउन खुलने पर सुनार की दुकानें, शो रूम और नकदी लेन-देन करने वाली लोन कंपनियों के दफ्तर भी खुलने शुरू हो गए हैं. ज्वैलरी की दुकानें और शो रूम हमेशा से अपराधियों के निशाने पर होते हैं, इस परिस्थिति का आपराधिक तत्वों द्वारा लाभ उठाने की प्रबल संभावना बनी रहती है. आपराधिक तत्व अपने चेहरों पर मास्क पहनकर चोरी या लूट जैसी वारदातों को अंजाम दे सकते हैं.

मास्क नहीं लगाने पर एफआईआर

मुंबई में मास्क नहीं लगाने वालों पर बीएमसी सिर्फ जुर्माना ही नहीं वसूल रही है, बल्कि बिना मास्क लगाए घूमकर कोरोना संक्रमण फ़ैलाने वालो के खिलाफ महामारी एक्ट की धारा 188 के तहत एफआईआर (केस) भी दर्ज कराने लगी है. अब बीएमसी ने मास्क नहीं लगाने वालों पर जुर्माना राशि 200 से बढ़ा कर 400 कर दी है.  इतना ही नहीं अगर कोई व्यक्ति अपने कृत्यों से किसी दूसरे की जान खतरे में डालता है तो उसे 1 महीने से लेकर 6 महीने तक की जेल और जुर्माना दोनों लगा कर दंडित किया जा सकता है.

इस समय कोविड से बचने के लिए मास्क पहनना बहुत ही महत्पूर्ण है. भीड़भाड़ वाले इलाके में अपराधी और असामाजिक तत्वों की पहचान पुलिस उसके हुलिए जैसे उसकी चाल-ढाल और कपड़े से भी कर लेती है. सीसीटीवी पर हम निर्भर नहीं है. उसमें चेहरा नहीं दिखे लेकिन हमारे दूसरे सोर्स और क्लू से हम अपराधी तक पहुंच जाते है. थोड़ी दिक्कत जरूर होती है पुलिस को आरोपी पकड़ने में, लेकिन पुलिस की तेज़ नज़रों से अपराधी बच नहीं सकता है.

- चैतन्य एस, पुलिस उपायुक्त/प्रवक्ता, मुंबई पुलिस