Auto Taxi Mumbai

मुंबई. मुंबई (Mumbai) और उपनगरों (Suburbs) में नाइट कर्फ्यू (Night Curfew) लागू  किए जाने का गंभीर असर टैक्सी-रिक्शा (Taxi-Rickshaw) व्यवसाय पर पड़ रहा है। कोरोना के चलते लॉकडाउन (Lockdown) में मुंबई के रिक्शा-टैक्सी वालों का व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गया था। रोजी-रोटी बंद हो जाने से ज्यादातर चालक अपने परिवार के साथ पलायन कर गए थे। मुंबई में अनलॉक (Unlock) होने के बाद फिर से टैक्सी-रिक्शा का व्यवसाय पटरी पर आ रहा था। इस बीच, ब्रिटेन (Britain) में कोरोना (Corona) के नए रूप का प्रभाव मुंबई पर भी पड़ने की आशंका और नववर्ष को देखते हुए सरकार ने नाइट कर्फ्यू लगाने की घोषणा कर दी। 

यह नाइट कर्फ्यू 5 जनवरी तक चलेगा. इसका सबसे ज्यादा असर मुंबई पर पड़ रहा है। मुंबई में दिन-रात टैक्सी-रिक्शा चलते हैं, लेकिन अब रात 11 बजे से 6 बजे तक ज्यादातर सार्वजनिक वाहनों के पहिए थम गए हैं. टैक्सी चालक अनिल तिवारी ने कहा कि अब मुंबई में रहना मुश्किल हो गया है, टैक्सी रिक्शा चालक पैसे-पैसे को मोहताज हो गए हैं। तिवारी ने कहा कि हर साल नव वर्ष पर काफी अच्छा धंधा होता था, लेकिन इस साल तो रात्रि कर्फ्यू की वजह से मुश्किल और बढ़ गई है।

रिक्शा चालकों को  मिले ढील : सुरेंद्र उपाध्याय

संघर्ष ऑटो चालक-मालक यूनियन के संस्थापक  सुरेंद्र उपाध्याय ने कहा कि रात्रि कर्फ्यू में ढील दी जानी चाहिए ताकि गरीब रिक्शा चालकों को राहत मिल सके। वैसे दिन की अपेक्षा रात में कम ही भीड़ होती है। यूनियन के सलाहकार संतोष तिवारी ने कहा कि रिक्शा-टैक्सी चालक घोर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। सरकार को इनकी तरफ ध्यान देना होगा।

टैक्सी चालकों पर संकट : ए.एल क्वाड्रोस

मुंबई टैक्सी मेंस यूनियन के महासचिव ए.एल.क्वाड्रोस ने कहा कि रात्रिकालीन कर्फ्यू लगाए जाने से टैक्सी चालकों पर संकट और बढ़ गया है। एयरपोर्ट, मेट्रो, स्टेशनों, अस्पतालों की अत्यावश्यक सेवा के लिए टैक्सी चालकों को छूट दी गई है। आम यात्रियों के लिए रोक के चलते टैक्सी वालों के लिए नए वर्ष की शुरुआत में भी व्यवसाय चौपट हो जाएगा।