क्षमता बढ़ाने के लिए 103 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया जा रहा : इसरो
बेंगलुरु. एक बार में ही 103 उपग्रहों के प्रस्तावित प्रक्षेपण में महीने भर से भी कम समय बचे रह जाने के बीच भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज कहा कि इसका लक्ष्य हर प्रक्षेपण के बाद इसकी क्षमता बढ़ाना है, ना कि रिकार्ड कायम करना है.  इसरो अध्यक्ष एएस किरन कुमार ने बताया कि हम इसे रिकार्ड या किसी अन्य चीज के रुप में नहीं देख रहे हैं. हम हर प्रक्षेपण के बाद महज अपनी क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और उस प्रक्षेपा का उपयोग उस क्षमता के लिए करना चाहते हैं जो इसने पाई है तथा बदले में अधिकतम क्षमता पाना चाहते हैं. इसरो के पीएसएलवी सी 37 के जरिए भेजे जाने वाले 103 उपग्रहों में 100 विदेशी हैं.  कुमार ने कर्नाटक आईसीटी सम्मेलन 2017 से इतर एक सवाल के जवाब में बताया कि दरअसल, वे सब एक समूह हैं, वे उपग्रहों के समूह में शामिल हो रहे हैं जो पृथ्वी की अवलोकन कर रहे हैं. 3 भारतीय उपग्रहों में कार्टोसेट-2 श्रृंखला के हैं. अंतरिक्ष एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में जनवरी के आखिरी हफ्ते में 83 उपग्रह प्रक्षेपित करने की योजना थी जिनमें 80 विदेशी थे, लेकिन 20 और विदेशी उपग्रहों के जुड़ जाने से प्रक्षेपण में एक हफ्ते की देर हुई है और अब यह फरवरी के प्रथम हफ्ते में होगा. कुमार ने यह भी बताया कि इसरो जल्दी जल्दी प्रक्षेपण किए जाने और हर प्रक्षेपण का उपयोग करने या प्रक्षेपण यान की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है. उन्होंने बताया कि अगले प्रक्षेपण के तहत हमारे खुद के कार्टोसेट-2 श्रृंखला के उपग्रहों के साथ विभिन्न कंपनियों के कई उपग्रहों का प्रक्षेपण होने वाला है और इसके फौरन बाद हमारे पास जीएसएलवी मार्क-3 और मार्क-2 है. पहले 3 महीनों में हम यह लक्ष्य कर रहे हैं, लेकिन इसके अलावा हम हर महीने एक प्रक्षेपण के लिए काम करने की कोशिश भी कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि इन सबका लक्ष्य क्षमता बढ़ाना है. हालांकि, हमारे पास कई उपग्रह हैं पर जरुरी सेवाओं के लिए हमें कई और की भी जरुरत है. मंगल मिशन की सफलता के बाद इसरो अपने दूसरे चंद्र मिशन के लिए प्रयोग कर रहा है. शुक्र और बृहस्पति के लिए अभियान पर भी अध्ययन जारी है.  कुमार ने कहा कि जैसे जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, हमें दीर्घकाल पर नजर रखने की जरुरत है. इसलिए हम चंद्रयान-2 से आगे देख रहे हैं जिसके लिए हम एक मंजूरी प्राप्त कार्यक्रम पर पहले से काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि इसके आगे मंगल-2 और शुक्र मिशन भी है. फिलहाल, वे सभी अध्ययन के चरण में हैं.  इसरो चंद्रयान-2 के लिए नुकसान टालने वाला परीक्षण कर रहा है.  इसरो अध्यक्ष और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी (सीएनईएस) अध्यक्ष जे वाई ले गाल ने मेहमान फ्रांसीसी विदेश मंत्री जेएम अयरॉल्त की मौजूदगी में सोमवार को उपग्रह प्रक्षेपण प्रौद्योगिकी पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है. इस समझौते के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि फिलहाल हम उनके साथ ओसनसैट-3 पर काम कर रहे हैं. हम भविष्य में उपग्रहों, प्रक्षेपण यान के विकास के विभिन्न क्षेत्रों पर साथ काम करने की भी संभावनाएं तलाश रहे हैं.