नई दिल्‍ली. यूपी चुनाव के लिए ऑल इण्‍डिया मजलिस-ए-इत्‍तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) अपने 11 उम्‍मीदवारों की सूची जारी कर चुकी है। सूची एआईएमआईएम की जारी हुई है लेकिन उसका असर दूसरे दलों में देखने को मिल रहा है। एआईएमआईएम की सूची से जहां सपा-बसपा परेशान हुई है तो भारतीय जनता पार्टी खुश नजर आ रही है। एआईएमआईएम ने ज्‍यादातर उन सीटों पर अपने उम्‍मीदवार उतारे हैं जहां सपा और बसपा के मौजूदा विधायक हैं। जिन तीन सीट पर भाजपा के विधायक हैं तो वहां दूसरे स्‍थान पर रहने वाले उम्‍मीदवार सपा-बसपा या कांग्रेस से हैं।
एआईएमआईएम पहले चरण की चार तो दूसरे चरण की सात सीट पर अपने उम्‍मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। पहले चरण के लिए आगरा साउथ, कैराना, अलीगढ़ की कोल और फिरोजाबाद विधानसभा सीट पर उम्‍मीदवार घोषित किए गए हैं। आगरा साउथ की बात करें तो इस सीट पर कांग्रेस के बाद 1985 से लगातार भाजपा कब्‍जा कर रही थी। 2007 में बसपा ने भाजपा के इस तिलिस्‍म को तोड़ा था। लेकिन परिसीमन के चलते 2012 में एक बार फि भाजपा ने सीट को कब्‍जा लिया। आगरा में सबसे ज्‍यादा मुस्‍लिम वोटर इसी सीट पर बताए जाते हैं।
अब जरा अलीगढ़ की कोल विधानसभा की बात करें तो भाजपा को पछाड़ने के बाद दो बार इस सीट पर बसपा काबिज रही। 2012 में ये सीट सपा के खाते में चली गई। सिर्फ 600 वोट से सपा ने ये सीट जीती थी। यहां भी बड़ी संख्‍या में मुस्‍लिम वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 1991 में एक बार भाजपा ने फिरोजाबाद सीट पर जीत का स्‍वाद चखा था। लेकिन उसके बाद एक बार दूसरे नम्‍बर पर रही तो 2012 में जीत हाथ लग गई। लेकिन यहां भी जीत का कोई बड़ा अंतर नहीं था। सपा के सामने सिर्फ दो हजार वोटों से भाजपा उम्‍मीदवार ने जीत दर्ज कराई थी।
1996 के बाद से तो कैराना सीट को भाजपा की पुश्‍तैनी सीट मान लिया गया था। लेकिन 2014 में भाजपा विधायक सीट छोड़ लोकसभा लड़ने चले गए। बेटी को उपचुनाव लड़ाया तो सपा उम्‍मीदवार ने सिर्फ एक हजार वोटों से जीत हासिल कर इस सीट पर भाजपा का रिकार्ड तोड़ दिया।
दूसरे चरण की सात सीट भी कोई कम नहीं हैं। सात में से चार सीट मुरादाबाद देहात, नगर, कुंडरकी और अमरोह पर सपा का कब्‍जा है। बरेली में भाजपा तो बेहट पर बसपा, सहारनपुर में बसपा का कब्‍जा है। सूत्रों की मानें तो ये सभी 11 वो सीट हैं जहां मुस्‍लिम वोट किसी भी पार्टी के उम्‍मीदवार के खाते में हार-जीत डालने का आंकड़ा रखता है। इसी आंकड़ेबाजी ने सपा-बसपा की नींद उड़ा दी है तो भाजपा एआईएमआईएम की सूची को देखकर फूली नहीं समा रही है।
एआईएमआईएम के प्रदेश अध्‍यक्ष शौकत अली का कहना है कि हमारी लड़ाई भाजपा संग सपा से भी है। सपा ने मुसलमानों संग वादाखिलाफी की है। और रहा सवाल भाजपा को फायदा पहुंचाने की गरज से उम्‍मीदवार उतारना तो ये आरोप गलत है। हमने वो सीट चुनी हैं जहां हमारे उम्‍मीदवार जीतेंगे।