नोएडा. चुनाव शतरंज का खेल होता है। जीत की तरफ अग्रसर होने के लिए विपक्षी की चाल व उसकी कमजोरी पर नजर रखनी पड़ती है। चुनाव में राजनीतिक दलों ने चाल चलने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
खास नजर विपक्षी पर्टियों के नाराज लोगों के दिल पर मरहम लगा उन्हें अपना बनाने की है। नेताओं ने इस दिशा में बहुत सोच-समझ कर कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। मतदाताओं के मत पडऩे की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। जिसमें एक माह का समय बचा है। चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए नेता साम, दाम, दंड व भेद चारों तरीके अपनाते हैं।
सभी दल के नेताओं ने दूसरे दल के ऐसे लोगों पर नजरें गड़ा दी हैं जो टिकट या सम्मान न मिलने से नाराज हैं। सभी दलों में टिकट मांगने वाले नेताओं की लंबी कतार है। सपा व बसपा ने अपने पत्ते खोलते हुए उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। बीजेपी व कांग्रेस भी जल्द घोषणा कर देंगे। बीजेपी व कांग्रेस से भी अंतिम मुहर लगाने के लिए तीन-तीन नेताओं के सूची हाईकमान को भेजी जा चुकी है।
इससे लगभग यह साफ हो गया है कि मैदान में कौन आ सकता है। सभी को टिकट मिलने से रहा। जाहिर है जिसे निराशा मिलेगी वह नाराज होगा। दूसरे दलों ने ऐसे नाराज लोगों पर नजर रखना शुरू कर दिया है। नेताओं की इच्छा दूसरे दल के नाराज नेताओं को अंदर ही अंदर अपने पाले में करना है। जिससे उनका साथ लेकर अपने पाले में वोटों की संख्या को बढ़ाया जा सके।
नाराज लोगों को अपने पाले में लाने की जिम्मेदारी नेताओं ने अपने खास लोगों को दी है। खास लोगों ने दूसरे दल के नाराज लोगों से मिल उनके दर्द को साझा कर अपने पाले में करने की चाल चलनी शुरू कर दी है। पार्टी से नाराज लोग अंदरखाने अपनों का वोट दूसरी पार्टी के खाते में डलवा देते हैं। पूर्व के चुनावों में देखने में आया है कि यह रणनीति काफी कारगर हुई थी। इससे काफी वोट एक पाले से दूसरे में चले जाते हैं। देखना है इस बार दूसरे दल के रूठों को मना नेता कितना लाभ ले पाते हैं।