भारत में टेनिस के लिए पर्याप्त पैसा, लेकिन एआईटीए इच्छुक नहीं : कार्ति
चेन्नई. तमिलनाडु टेनिस संघ के उपाध्यक्ष कार्ति चिदंबरम ने कहा है भारत में टेनिस खिलाड़ियों के लिए पैसा जुटाना समस्या नहीं है बशर्ते अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) इच्छाशक्ति दिखाए. उन्होंने हालांकि स्वीकार किया कि देश में सिर्फ क्रिकेट की 'व्यावसायिक रुप से व्यावहारिक' खेल है.  यहां चल रहे चेन्नई ओपन की आयोजन समिति के अध्यक्ष कार्ति ने कहा कि अगर भारत के पास अच्छे स्तरीय एकल खिलाड़ी नहीं हैं तो इसका कारण यह है कि बदलाव के दौर में उन्हें एआईटीए का साथ नहीं मिला. एआईटीए ने 2014 में हितों के टकराव का हवाला देकर कार्ति को उपाध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया था. कार्ति ने कहा कि मैं यह नहीं मानता कि यह गरीब देश है और हमारे पास खिलाड़ियों के लिए पैसा नहीं है. आप कितने पैसे की बात कर रहे हो, छह खिलाड़ियों के लिए साल में अधिकतम तीन करोड़ रुपये. यह पांच लाख डालर है. आपको लगता है कि इस देश में इन खिलाड़ियों के लिए इतना पैसा नहीं है. इच्छाशक्ति नहीं है. लोग मंदिरों और समारोह के लिए पैसा जुटा रहे हैं. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति ने कहा कि भारत के एलीट खिलाड़ियों के लिए उनके पास योजना है जिसे अगर लागू किया जाए तो भारतीय टेनिस के दिन बदल सकते हैं. कार्ति ने कहा कि युकी भांबरी, रामकुमार रामनाथन, सुमित नागल, दक्षिणेश्वर सुरेश और नितिन सिन्हा का समर्थ करना चाहिए जिससे वह समान कोच और ट्रेनर के साथ यात्रा कर सकें. उन्हें 26 टूर्नामेंटों में खेलने की जरुरत है जिसमें से कम से कम 18 विदेश में होंगे, 20 हफ्ते की ट्रेनिंग और साल में छह हफ्ते आराम. कार्ति के अनुसार यह सब तीन करोड़ रुपये में किया जा सकता है.  कार्ति ने कहा कि एआईटीए अगर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे और 50 करोड़ रुपये का 'विकास कोष' तैयार करे तो देश में खेल को काफी फायदा हो सकता है.